सहारनपुर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना के तहत सहारनपुर में बनने वाले 135 एमएलडी के एसटीपी का कार्य पांच साल बाद भी शुरू नहीं हो सका है। नतीजा, महानगर से होकर गुजरने वाली नदियां लगातार दूषित हो रही हैं, जो हिंडन और यमुना नदी को भी दूषित कर रही हैं। बीते पांच साल में महानगर का करीब 1,82,500 मिलियन लीटर दूषित पानी नदियों में गिरा है।
महानगर से प्रतिदिन करीब 135 से 140 मिलियन लीटर दूषित पानी निकलता है, जो नालों और सीवर के जरिए होते हुए पांवधोई नदी और ढमोला नदी में गिरता है। यह नदियां आगे चलकर हिंडन और उसके बाद यमुना नदी को दूषित करती हैं। मल्हीपुर रोड पर कई दशक पहले से केवल 28 एमएलडी का एसटीपी है, जो वर्तमान में निकल रहे करीब 135 मिलियन लीटर पानी में से केवल 28 मिलियन लीटर पानी को ही साफ कर पा रहा है। शेष करीब 100 मिलियन लीटर दूषित पानी नदियों में ऐसे ही बहाया जा रहा है। वर्ष 2019 में नमामि गंगे योजना के तहत सहारनपुर में 135 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) का एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) 2019 से प्रस्तावित है। इसके लिए 6.5 हेक्टेयर यानी 100 बीघा जमीन चाहिए थी। पहले तीन साल में संबंधित अधिकारी एसटीपी के लिए जमीन नहीं तलाश सके। उसके बाद जमीन मिली तो कार्य शुरू नहीं हो सका।
ढमोला पार बनेगा एसटीपी, 597 करोड़ की परियोजना
एसटीपी के लिए ढमोला नदी के किनारे पर जमीन खरीदी गई है। यह जमीन पुराने एसटीपी के पास ही है। 135 एमएलडी के एसटीपी की यह परियोजना 597 करोड़ रुपये की है। एसटीपी तैयार होने के बाद महानगर से निकलने वाले दूषित पानी का ट्रीटमेंट होगा, जिसके बाद उक्त पानी को सिंचाई आदि के उपयोग में लाया जा सकेगा। या ढमोला में छोड़ा जाएगा।
आचार संहिता के बाद शुरू होगी प्रक्रिया
अधिशासी अभियंता संजीत कुमार कटियार ने बताया कि एसटीपी की फाइनेंशियल बिड खुल चुकी है। कार्य एनएमसीजी करेगी। प्रक्रिया आचार संहिता हटने के बाद शुरू हो जाएगी। एसटीपी की फंडिंग वर्ल्ड बैंक कर रहा है। यह पीपीपी मोड पर बनेगा। इसमें 40 फीसदी पैसा सरकार देगी, जबकि 60 फीसदी पैसा फर्म खर्च करेगी। 15 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी फर्म की होगी। सरकार 15 साल में फर्म का पैसा किस्तों में लौटाएगी।