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‘संपति का दोहन कर रहे लोगों के खिलाफ होगी कार्रवाई’

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गंगोह (सहारनपुर)। आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष ने कहा कि जो लोग आर्य समाज की संपत्ति के दोहन में लगे हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। आर्य समाज के वार्षिक उत्सव के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान डा. धीरज सिंह आर्य ने संबोधन में कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती महाराज द्वारा स्थापित आर्य समाज कोई धर्म, मजहब, पंथ, संप्रदाय नहीं बल्कि सतत चलने वाला एक आंदोलन है।
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आर्य समाज अपने दस नियमों को लेकर महर्षि दयानंद की वैदिक विचारधारा को आगे बढ़ाने का कार्य ही कर रहा है। शराब, मांसाहार आदि अभक्ष्य पदार्थों को खाने और अंधविश्वास, पाखंड, आडंबर से मनुष्यों को बचाने के लिए खुला विरोध करता है। अंतरजातीय विवाह का समर्थक और जातिवाद का विरोधी है। आर्य समाज ने ही सर्वप्रथम अबला कही जाने वाली महिलाओं को अधिकार दिलाने और अनुसूचित को गले लगा सम्मान दिलाने का काम किया। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के नियम एवं सिद्धांतों के विपरीत कार्य में संलिप्त तथाकथित आर्य समाजियों को बख्शा नहीं जाएगा। कुछ आर्य समाज अपनी आय का नियमानुसार दसवां हिस्सा प्रदेश सभा को नहीं भेज रही हैं, जबकि प्रदेश भर की आर्य समाजों की संपत्ति प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा लखनऊ की है और सभा ही उनकी मालिक है। उन्होंने सदस्य संख्या बढ़ाने के लिए नौजवानों को आर्य समाज से जोड़ने और उन्हें पद सौंपे जाने को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने गुरुकुलों की आर्थिक मदद अनुदान के रूप में किए जाने संबंधी मुख्यमंत्री को दिये ज्ञापन की बाबत कहा कि महर्षि दयानंद और सत्यार्थ प्रकाश को गुरुकुलों से पृथक किए जाने संबंधी सरकार के विचार को प्रदेश सभा ने इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई महर्षि दयानंद और सत्यार्थ प्रकाश को गाली देगा तो सुनी नहीं जाएगी। पूर्व प्रदेश उपमंत्री डा. हरिसिंह आर्य, डा. वीरसिंह भावुक, पूर्व जिला प्रधान विरेंद्र शास्त्री, देवेंद्र आर्य ने भी विचार रखे।
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