देवबंद (सहारनपुर)। रणखंडी के ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या गांव से गुजर रहा नाला है, इससे हैंडपंपों का पानी भी प्रदूषित हो गया है। जिस कारण गांव में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन प्रशासन इस भयावह समस्या से निजात नहीं दिला पा रहा है।
ग्रामीण मनोज कुमार व छोटू राणा ने बताया कि पिछले आठ सालों में कैंसर से मरने वालों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई है। परेशान ग्रामीणों ने पंचायतें और बैठकें करने के साथ अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है, लेकिन समस्य जस की जस बनी हुई है। बता दें कि नवंबर माह के भीतर ही पांच लोगों को कैंसर निगल चुका है।
कैंसर का दंश झेल रहे कई लोग
* कैंसर पीड़ित ठाकुर नकली सिंह बताते हैं कि वह स्वयं इस जानलेवा बीमारी से पीड़ित हैं। साथ ही न जाने गांव में कितने परिवार के लोग कैंसर का दंश झेल रहे हैं। नाले को लेकर जिला व प्रदेश स्तर के अधिकारियों को लिखित शिकायत के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
हैंडपंपों का पानी हुआ प्रदूषित
* कैंसर पीड़ित ठाकुर राजवीर सिंह ने बताया कि नाले के कारण हैंडपंपों का पानी प्रदूषित हो चुका है जो पीने लायक नहीं है। इस पानी को पीने से गांव के लोग लगातार भयानक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
हवा भी हो चुकी प्रदूषित
* कैंसर पीड़ित गुलाब सिंह ने बताया कि गांव से होकर जा रहे नाले ने पानी के साथ ही हवा को भी दूषित कर दिया है। अब यहां की हवा में सांस लेना भी मुश्किल है। यही हालात रहे तो लोग धीरे धीरे गांव से पलायन करने को मजबूर हो जाएंगे।
समस्या के निराकरण को प्रयासरत
*ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दिनेश फौजी ने बताया कि नाले की सफाई और खोदाई लंबे समय से नहीं हो पाई है। समस्या का निराकरण कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
2007 से नहीं हुई नाले की सफाई
* जांच में पता चला कि वर्ष 2007 से नाले की सफाई नहीं हो पाई है। पूर्व में मिल अधिकारियों और नगर पालिका के अधिकारियों के साथ बैठक कर नाले की सफाई को निर्देशित किया गया है।
-ऋतु पुनिया, एसडीएम देवबंद
एक बच्चा व दो महिलाएं कैंसर से पीड़ित मिले
* स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजकर कैंसर से हो रही मौतों का पता लगवाया था। सिर्फ एक बच्चा (ब्लड कैंसर) और दो महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित मिली थी, लेकिन इनकी बीमारियों के कागजात चंडीगढ़ पीजीआई में जमा थे। बाकी मौतों के बारे में ग्रामीणों से जानकारी मिली है, लेकिन उनके कोई भी कागजात नहीं मिले हैं। फिर भी गांव में टीम भेजकर पीड़ितों का उपचार कराया जाएगा।
- डा. इंद्राज सिंह, चिकित्सा अधीक्षक