सहारनपुर। चिकित्सा विभाग को डेंगू के मामलों की सूचना नहीं देने वाले प्राइवेट डॉक्टरों से विभाग नाराज है। सीएमओ ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की स्थानीय शाखा को पत्र लिखा है। अधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट डॉक्टरों से सूचना नहीं आ पाने के कारण विभाग बीमारी की रोकथाम के लिए जो कार्यवाही करना चाहता है उसमें भी देर हो जाती है।
शासन और चिकित्सा विभाग प्रत्येक वर्ष डेंगू, मलेरिया और संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए अनेक कार्यक्रम चलाते रहे हैं। खासकर डेंगू को लेकर विभाग अधिक सतर्क है। कई बार देखने में मिला है कि किसी भी प्राइवेट अस्पताल में डेंगू का मरीज भर्ती होने की सूचना विभाग को समाचार पत्रों से मिलती है। जबकि नियमानुसार संबंधित चिकित्सक को डेंगू की पुष्टि होने के बाद सबसे पहले चिकित्सा विभाग को सूचना देनी चाहिए। मगर शहर के ज्यादातर प्राइवेट डॉक्टर और पैथोलॉजी लैब संचालक अपने यहां आने वाले डेंगू के मरीजों की जानकारी चिकित्सा विभाग को नहीं दे रहे हैं, जिससे विभाग को आंकड़े दुरुस्त रखने में परेशानी आती है।
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गलत रिपोर्ट बनाने का धंधा रोकना भी प्राथमिकता
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. शिवांका गौड़ ने बताया कि डेंगू के अनेक मामले फर्जी निकलते रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ चिकित्सक पैथोलॉजी लैब के साथ सांठगांठ कर डेंगू की गलत रिपोर्ट तैयार करते हैं, जिसके बाद मरीज के इलाज के एवज में उनसे मोटा पैसा वसूला जाता है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को डेंगू बताया गया है तो वह तुरंत सरकारी अस्पताल में संपर्क कर डेंगू की मुफ्त की जांचें कराए।
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गत वर्षों में प्राइवेट डॉक्टर डेंगू के मामलों की सूचना देते रहे हैं, मगर इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। ज्यादातर डॉक्टर इस बार सूचना देने में आनाकानी कर रहे हैं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. बीएस सोढी की ओर से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की स्थानीय शाखा को पत्र लिखा गया है।
डॉ. शिवांका गौड़, जिला मलेरिया अधिकारी।