सहारनपुर। स्मार्ट सिटी योजना में शामिल सहारनपुर शहर की बड़ी आबादी आज भी खुले में शौच कर रही है। नगर निगम ने शहर को ओडीएफ बनाने के लिए कवायद शुरू की है। 15 अगस्त तक शहर को ओडीएफ घोषित करना है, मगर यह राह मुश्किल नजर आ रही है, क्योंकि लक्ष्य के सापेक्ष व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण मुश्किल से 35 फीसदी ही हो सका है। प्रत्येक जरूरतमंद घर में 15 अगस्त तक शौचालय का निर्माण कराया जाना एक चुनौती ही है।
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्र में करीब एक लाख 40 हजार मकान हैं। इनमें उन 32 गांवों के मकान भी शामिल हैं, जो नगर निगम के गठन के दौरान शहर में शामिल किए गए थे। जानकर हैरानी होगी कि शहर का हिस्सा होने के बावजूद 32 गांवों के अनेक घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं। ऐसे परिवारों के लिए खुले में शौच करना मजबूरी बना हुआ है। साथ ही अनेक लोग ऐसे हैं, जो घरों में शौचालय होने के बावजूद खुले में ही शौच कर रहे हैं। अमर उजाला ने 19 जून के संस्करण में खुले में शौच की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। समाचार प्रकाशित होते ही नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह ने नगर के गांव मढ़ का दौरा किया था। उनके निरीक्षण में एक ही गांव के 40 घरों में शौचालय नहीं मिले थे। उसके बाद से नगरायुक्त ने शहर को ओडीएफ बनाने के लिए कवायद शुरू की हुई है। शौचालय विहीन घरों के लिए 5041 व्यक्तिगत शौचालयों का लक्ष्य रखा गया है, मगर अभी तक केवल 1834 ही व्यक्तिगत शौचालय बनाए जा सके हैं। सामुदायिक शौचालयों की बात करें तो 31 शौचालयों के सापेक्ष 24 ही शौचालय बन सके हैं। शेष शौचालयों के लिए नगर निगम के अधिकारी जमीन तलाश रहे हैं। इसके अलावा 52 सार्वजनिक शौचालयों का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 51 शौचालय बना लिए जाने का दावा किया जा रहा है।
स्टेशन के आसपास के क्षेत्र में समस्या
रेलवे स्टेशन के आसपास सड़कों पर बसे लोग शहर को ओडीएफ बनाने की राह में बड़ा रोड़ा हैं। यह लोग वर्षों से परिवारों के साथ स्टेशन के आसपास पुल और सड़कों पर डेरा डाले हैं। आसपास कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं होने की वजह से यह लोग 24 घंटे रेलवे स्टेशन के पास लाइनों पर ही शौच कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि रेलवे के कर्मचारी भी इनको रोकते नहीं हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि स्टेशन परिसर में सार्वजनिक शौचालय के लिए नगरायुक्त की ओर से डीआरएम अंबाला डिवीजन को पत्र लिखा गया है। पत्र में कहा गया है कि यदि रेलवे शौचालय बनाने में असमर्थ है तो वह जमीन मुहैया कराए नगर निगम शौचालय बनाकर देगा। मगर अभी तक पत्र का कोई जवाब नहीं मिला है।
60 वार्डों के ओडीएफ होने का दावा
नगर निगम के अधिकारी 70 में से 60 वार्डों के ओडीएफ हो जाने का दावा कर रहे हैं। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शेष दस वार्डों केे ओडीएफ बनाने के लिए नगर निगम शौचालय बनवाकर दे रहा है। इसके लिए निगम की टीमें लगातार क्षेत्र में दौरा कर लोगों को शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, जिसके लिए पैसा भी नगर निगम देगा।
मोबाइल शौचालय शुरू करने की तैयारी
जिन क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालय नहीं बनाए जा सकते हैं। वहां नगर निगम मोबाइल शौचालय लगाएगा। अधिकारियों ने बताया कि वह शहर के विभिन्न हिस्सों में मोबाइल शौचालय लगाएंगे। इन क्षेत्रों में रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के क्षेत्र भी शामिल हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल के पास और बस अड्डों के पास भी ऐसे शौचालय उपलब्ध होंगे।
शौचालय के लिए निगम से करें संपर्क
नगर निगम व्यक्तिगत शौचालय के लिए आठ हजार रुपये की मदद पात्रों को दे रहा है। यदि नगर क्षेत्र में निवास करने वाले किसी भी परिवार के पास आर्थिक तंगी की वजह से अपना शौचालय नहीं है तो वह नगर निगम में नगर स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय या फिर अपने सफाई निरीक्षक से संपर्क कर शौचालय बनवा सकता है।
जब तक शहर वास्तविक रूप से ओडीएफ नहीं बनेगा, तब तक इसके स्मार्ट सिटी होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। शहर को ओडीएफ बनाने के लिए हम युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। मगर हमें आम नागरिकों का भी सहयोग चाहिए। आम आदमी को चाहिए कि वह अपने स्तर से लोगों को खुले में शौच या लघुशंका करने से रोके। लोगों को चाहिए कि वह खुले में जाने की बजाय शौचालय का इस्तेमाल करें और स्मार्ट होने का परिचय दें।
- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।