सहारनपुर। बरसात सिर पर है, मगर नगर निगम अभी तक शहर के नालों और नालियों की सफाई नहीं करा सका है। सफाई तो दूर की बात अभी तक कोई प्लान तक नहीं बना है। ठेकों की स्थिति भी अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बरसात में शहर में जलभराव होना लाजिमी है। अब स्मार्ट सिटी में शामिल होने के बावजूद नगर निगम के अधिकारी न तो खुद स्मार्ट बन सके हैं न ही अपनी कार्यप्रणाली को स्मार्ट कर पाए हैं।
शहर में चार बड़े और 120 से अधिक छोटे नाले हैं। चारों बड़े नालों की सफाई मशीन और छोटे नालों की सफाई मजदूरों से ठेका देकर कराई जाती है। बरसात के मौसम से पहले इन नालों और नालियों की सफाई की जाती रही है, जिसका जिम्मा नगर निगम पर है। लेकिन इस बार बरसात से पहले नालों और नालियों की सफाई नहीं हो पाई है। अमर उजाला टीम ने बुधवार को शहर का भ्रमण कर नालों की सफाई की हकीकत जानने का प्रयास किया। तोता चौंक से मूंगागढ़ की ओर जाने वाले मार्ग पर राइस मिल की ओर बना नाला पूरी तरह ध्वस्त मिला। नाले में शिल्ट जमी और कचरा फैला नजर आया। स्थानीय निवासी अमित ने बताया कि नाले की सफाई सालों से नहीं हुई है। चकराता रोड पर बीडी बाजोरिया इंटर कॉलेज के पास रोड के दोनों ओर बने नाले भी गंदगी से अटे मिले। महाराज सिंह कॉलेज के सामने से गुजर रहे नाले में कचरा और शिल्ट जमा मिला। चिलकाना रोड की बात करें तो मुन्नालाल कॉलेज के सामने से होकर गुजर रहे नाले की कुछ ही जगह से सफाई की गई है। अनेक जगहों पर शिल्ट जमी है, जिसपर घास भी उगी हुई है। घास इस बात का प्रमाण है कि नाले की सफाई वर्षों से नहीं हुई है। पुराना कलसिया रोड पर राइस मिल के बगल से गुजर रहे नाले शिल्ट से पूरी तरह अटे हैं। दाल मंडी पुल से जोगियान पुल की ओर जाने वाले मार्ग पर मार्केट की साइड में बना नाला गंदगी से अटा मिला। कोर्ट रोड पर घंटाघर से कोर्ट रोड ओवरब्रिज तक दोनों ओर का नाले को दोबारा बनाया जाना है। ऐसे में नाले की सफाई नहीं की गई है। नाले के निर्माण का कार्य भी काफी धीमी गति से चल रहा है। जैन कॉलेज रोड पर जिला पंचायत कार्यालय के सामने से गुजर रहा नाला मिट्टी से भरकर विलुप्त हो गया है। नाले की वर्षों से सफाई नहीं हुई है। इसकी वजह से हल्की सी बरसात में जैन कॉलेज रोड के साथ ही कलक्ट्रेट में भारी जलभराव रहता है। शहर भर के नालों की ऐसी ही स्थिति है।
मच्छरों से निपटने में भी नाकाम रहा निगम
मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए नगर निगम प्रत्येक वर्ष नाले और नालियों में एंटी लारवा का छिड़काव कराता है, जिससे मच्छर पैदा ही न हों। साथ ही शहर भर में फॉगिंग कराकर पैदा हो चुके मच्छरों का खात्मा किया जाता है। इन सब कार्यों के लिए नगर निगम के पास मोटा बजट होता है। मगर इस बार केवल कागजों में ही अनेक नालों में एंटी लारवा का छिड़काव किया गया। फॉगिंग भी कुछ खास इलाकों जैसे पुलिस लाइन, कलक्ट्रेट, ऑफिसर कॉलोनी आदि में ही की गई, जबकि जिन मलिन बस्तियों में फॉगिंग की सबसे अधिक जरूरत थी, वहां नगर निगम नहीं पहुंचा।
मशीनरी और मैनपावर फिर भी देरी
नालों और नालियों की सफाई के लिए नगर निगम के पास महंगी मशीनें और बड़ी संख्या में मैनपावर है। मगर इसके बावजूद नालों और नालियों की बरसात से पहले सफाई न होना पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। पिछले दिनों हुई हल्की सी बारिश में ही आधे से अधिक शहर जलमग्न हो गया था, जिसके बावजूद नगर निगम के अधिकारियों से गंभीरता नहीं दिखाई।
नालों की सफाई के लिए टेंडर हो चुके हैं। अभियान चलाकर नालों और नालियों की सफाई की जाएगी। ठेकेदारों को बरसात से पहले नालों की अच्छे से सफाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पूरी सफाई होने के बाद ही ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा।
- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।