शाकंभरी (सहारनपुर)। शिवालिक वन प्रभाग में आने वाली तीनों वन रेंज में वनकर्मी पिछले 10 से 12 वर्षों से तैनात हैं, जबकि उत्तर प्रदेश शासन की स्थानांतरण नीति के अनुसार एक जनपद में तीन वर्षों से ऊपर कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं रह सकता। अधिकतर वनकर्मियों के परिवार पास ही उत्तराखंड में रहते हैं।
बता दें कि लगभग 33000 एकड़ में फैली शिवालिक वन प्रभाग की तीनों रेंज बादशाहीबाग, शाकंभरी एवं मोंहड के जंगल में आए दिन अवैध कटान एवं जंगली जानवरों का शिकार होता रहता है। अभी हाल में ही शिकारियों ने शाकंभरी वन रेंज में एक नीलगाय को निशाना बनाते हुए शिकार किया था। जंगलों में हो रहे अवैध कटान एवं शिकार के मामले में पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से जमे वनकर्मियों की संलिप्तता से भी इंकार नहीं किया जा सकता। इसी वन प्रभाग की बादशाही बाग वन रेंज में एक डिप्टी रेंजर विगत 2003 यानी 15 वर्षों से इसी रेंज में डटा हुआ है, जबकि दो फॉरेस्टर जिनमें एक लगभग 12 वर्षों से एवं दूसरा फॉरेस्टर पिछले 10 वर्षों से जमे हैं। वहीं मोहंड वन रेंज में एक वनरक्षक पिछले 10 वर्षों से गृह जनपद एवं एक ही बीट में कार्यरत है, जबकि एक वन दरोगा इसी रेंज में एक ही सेक्सन में पिछले 10 वर्षों से जमा हुआ है। शाकंभरी वन रेंज का हाल भी इससे कम नहीं है। एक फारेस्ट गार्ड पिछले 8 वर्षों से दो फारेस्ट गार्ड पिछले 7 वर्षों से डटे हुए हैं।
रिजर्व फारेस्ट में तीन वर्षों से ज्यादा समय होने वाले वनकर्मियों को हटाया जाएगा। आर बाला चन्द्रनन, डीएफओ शिवालिक।