सहारनपुर। पांवधोई नदी में 70 से अधिक नालों और सीवर के मुंह खुले होने की वजह से यह लगातार दूषित हो रही है। इतना ही नहीं, अनेक लोगों ने अपने सेफ्टी टैंक बनाने की बजाय अपने शौचालयों के एग्जिट पाइप भी नदी में छोड़े हुए हैं। नदी में डाले जा रहे सीवर और नालों को बंद करने की बात तो कई बार हुई, मगर इस दिशा में आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया।
पांवधोई नदी शहर के बीच से होकर गुजर रही है। ऐसे में शहर भर से निकलने वाले गंदे पानी के नाले और नालियों को पांवधोई नदी में छोड़ा गया है। शिवधाम के दूसरी तरफ स्थित कॉलोनी के हजारों घरों का पानी सीधे पांवधोई नदी में डाला जा रहा है। बेहट अड्डे से सटी कॉलोनियों तक का पानी पांवधोई नदी में समा रहा है। चिलकाना रोड से होकर अरबी मदरसे के पीछे से बहने वाले शहर का सबसे बड़ा नाला भी पांवधोई में छोड़ा गया है। जिसमें मंडी क्षेत्र के घरों का वेस्ट पानी बहकर आता है। राकेश टाकीज तक कई छोटे बड़े नाले नदी में निकाले गए हैं। इतना ही नहीं, कई फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकलयुक्त पानी भी पांवधोई नदी में छोड़ा जा रहा है। करीब तीन वर्ष पहले नगर निगम ने नदी में डाले जा रहे नालों और सीवर की अलग व्यवस्था करने की बात कही थी। मगर यह योजना केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई।
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पांवधोई नदी में डाले गए नाले और नालियों के पानी को साफ कर नदी में छोड़ा जाना चाहिए। इस दिशा में नगर निगम प्लानिंग तैयार कर रहा है। नगर निगम की भी पूरी कोशिश यही है कि नदी को साफ बनाया जाए। मगर जन सहभागिता के बिना यह काम अधूरा है।
डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।