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मातृ एवं शिशु अस्पताल पर लटका ताला

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छुटमलपुर (सहारनपुर)। संसाधनों के अभाव और चिकित्सकों की तैनाती न होने के कारण सवा तीन करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया 30 बिस्तरों का मातृ एवं शिशु अस्पताल बंद पड़ा है। इसके साथ ही सीएचसी में भी चिकित्सकों, दवाइयों और एक्स रे फिल्म का टोटा बना है, जिस कारण यह अस्पताल केवल रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
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फतेहपुर भादो गांव में दून हाईवे किनारे बनाए गए इस अस्पताल को पिछले साल दिसंबर में स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर कर दिया गया था। अस्पताल भवन में मरीजों की सुविधा के लिए लिफ्ट तक लगाई गई है, लेकिन हैंडओवर होने के बाद इसमें ना तो आज तक जरूरी उपकरण भेजे गए और न ही चिकित्सकों की तैनाती की गई।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण करोड़ों के अस्पताल भवन पर ताला लटका है। सीएचसी के आंकड़ों के अनुसार प्रति माह केंद्र पर डेढ़ सौ महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। जबकि, दस से 12 को सीजेरियन होने के कारण बाहर भेजना पड़ता है। कई बार विलंब होने पर प्रसूता की जान पर बन आती है। नवजात बच्चों को भी बीमार होने की दशा में यहां उपचार नहीं मिल पाता है।
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इसके अलावा सीएचसी फतेहपुर भी संसाधनों की कमी से जूझ रही है। स्वच्छता के मामले में तो प्रदेश में लगातार दूसरी बार काया कल्प अवार्ड मिलने के बावजूद केंद्र पर सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, पैथोलोजिस्ट, रेडियोलोजिस्ट, जनरल फिजिशियन के पद रिक्त पड़े हैं। सर्जन न होने पर दुर्घटनाओं के घायलों को जिला अस्पताल भेजना पड़ता है। समय पर उपचार न मिलने से वे दम तोड़ जाते हैं। चार माह से एक्स रे फिल्म तक खत्म है, जिसके चलते रोगियों को बाहर से एक्स रे कराने पड़ते हैं। दवाइयां भी पर्याप्त मात्रा में नहीं भेजी जा रही है। जबकि, केंद्र पर पांच से छह सौ की ओपीडी प्रतिदिन होती हैं। दवाइयां न मिलने पर मेडिकल स्टोर से रोगियों को दवाई खरीदनी पड़ रही है। उधर, इस बारे में सीएचसी इंचार्ज डा. नवदीप गुप्ता ने बताया कि सीएमओ को स्थिति से अवगत कराया जा चुका है। मातृ एवं शिशु केंद्र के भी अप्रैल तक चलने की उम्मीद है।
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