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एक पक्षीय कार्रवाई हुई तो जमीयत उलमा-ए-हिंद करेगी विरोध : सिद्दीकी

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देवबंद (सहारनपुर)। बीजेपी सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान द्वारा वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में दर्ज आगजनी व पथराव के करीब 114 मामले वापस लिए जाने की संस्तुति करने पर ऑल इंडिया इक्तेसादी कौंसिल के अध्यक्ष व जमीयत उलमा-ए-हिंद के कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि इस मामले में एक पक्षीय कार्रवाई किया जाना सरासर गलत है। जबकि दंगे में करीब 50 हजार मुसलमान भी विस्थापित हुए थे।
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शुक्रवार को मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि एक पक्ष के मामले वापस लिए जाने की दिशा में कदम उठाना सरासर गलत और भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाना वाला है। ऐसे कदम को इंसाफ नहीं कहा जा सकता। मुजफ्फरनगर दंगे में इंसाफ तब माना जाएगा जब मामले वापस लेने की कार्रवाई कवाल गांव से शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि दंगे के दौरान मुसलमानों के घरों को लूटा गया, आगजनी की गई, उन्हें मौत के घाट उतारा गया, उनकी जमीनों पर कब्जे करने के साथ ही उनकी बहू बेटियों की इज्जत लूटी गई। इसलिए इंसाफ का तकाजा ये है कि दोनों पक्षों पर दर्ज मामलों को वापस लिया जाए। यदि प्रदेश सरकार इस मामले में एक पक्षीय कार्रवाई करती है तो इसे नाइंसाफी करार दिया जाएगा। मौलाना हसीब सिद्दीकी ने यह भी कहा कि अगर प्रदेश सरकार इस मामले में एक पक्षीय रवैया अपनाती है तो जमीयत उलमा-ए-हिंद राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी के नेतृत्व में इसका पुरजोर तरीके से विरोध करेगी।
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