फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सऊदी अरब की तब्दीलियों को हम माने ये जरुरी नहीं: उलमा

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

देवबंद (सहारनपुर)। सऊदी अरब में योग को खेल के रुप में अनिवार्य किए जाने के मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि सऊदी हुकूमत ने स्कूलों में वर्जिश को अनिवार्य किया है। योगा शिर्क (गलत) है इसलिए वहां की हुकूमत उसे कभी लागू नहीं कर सकती।
विज्ञापन

मंगलवार को फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि जैसा की खबरों में बताया जा रहा है कि सऊदी अरब के स्कूलों में किसी चीज को अनिवार्य किया गया है वो योगा नहीं बल्कि वर्जिश है। शरीयत के लिहाज से योग शिर्क है और सऊदी अरब अपने यहां शिर्क को कभी लागू नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वर्जिश सही है, लेकिन योगा इस्लामी नुकते नजर से गलत है। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि सऊदी अरब इस वक्त तब्दीली के दौर से गुजर रहा है और काफी बदलाव आ रहा है। शाह सलमान के बेटे मोहम्मद बिन सलमान वो अपने मुल्क में को एक मॉडर्न मुल्क के रुप में लाना चाहते हैं। दुनिया के नक्शे में वो जो तब्दीलियां कर रहे हैं जरूरी नहीं की हम भी उन्हें माने। हम सिर्फ शरीयत को मानते और उसी पर चलते हैं। इसलिए शरीयत में योगा की कोई गुंजाइश नहीं है। मौलाना वाजदी ने कहा कि सऊदी अरब इसकी इजाजत देता है या नहीं देता और योगा को खेल के रुप में देखता है या नहीं देखता यह हमारे लिए कोई अहमियत नहीं रखता। कहा कि सऊदी में और भी बहुत से चीजें हुई हैं और होने वाली हैं। लेकिन अगर वो शरीयत के अनुसार होंगी तो हम उसकी तारीफ करेंगे और अगर वो शरीयत के अनुसार नहीं होगी हम तस्दीक भी नहीं करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें