नानौता/लखनौती (सहारनपुर)। नानौता के ग्राम नैनपुर सादात में मुहर्रम की आठ तारीख को बिजनौर से आए मौलाना मुनव्वर अब्बास ने करबला में हुई हजरत अब्बास (अस) की शहादत का वाकया बयान किया। जिसे सुनकर मजलिस का माहौल गमगीन हो गया। मजलिस से पूर्व हजरत अब्बास (अस) की याद में सक्काई का आयोजन किया गया। इस दौरान घरों से छोटे व बडे़ अलम बरामद किए गए। इस दौरान जमीर अब्बास, हुसैन रजा, समर अब्बास, शबी हैदर, सलमान हैदर ने नोहा ख्वानी और मरसिया ख्वानी की। मजलिस के दौरान अदिल अख्तर, शब्बर हुसैन, मोहम्मद अब्बास, मुसैयब हुसैन, अली रजा, राहिब हुसैन, जुहैर अख्तर, मसाहिद रजा, सुहैल अख्तर, अथर हुसैन आदि रहे।
लखनौती में मौलाना आलिम ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि करबला के मैदान में यजीद के आतंक को खत्म करने के लिए हजरत हुसैन ने अपनी जान की कुर्बानी दी। जिसकी वजह से आज दुनिया में इंसानियत बाकी है। लखनौती के इमाम बारगाह हिंग्गों बेगम में मौलाना सैयद मोहसीन तकवी ने कहा कि करबला का यजीद उस समय का आतंकवादी था। जो मासूम लोगों पर जबरन अपने कानून को थोप कर इंसानियत को तार तार करता था। तमाम हराम कामों को वह सही बताता था, लेकिन इमाम हुसैन ने उसकी एक भी बात नहीं मानी। उसे ऐसा करने से मना किया तो उसने करबला की जंग को अंजाम दिया। जहां उससे मुकाबला करते हुए हजरत इमाम हुसैन ने अपने परिवार के छोटे मासूम बच्चों सहित अपने साथियों की जान की कुर्बानी देकर इंसानियत को बचाया। फरजंद अली, मिर्जा शाह हसन, कारिब बेग, मिर्जा अजहर अब्बास, अरशद अब्बास, काल्लू बेग, मिर्जा शाहजान उधर गांव हुसैनपुर में मौलाना बेदार साहब ने दरगाह हजरत अब्बास में मजलिस से खिताब करते हुए बाबे खेबर पर रोशनी डाली। इसके अलावा शकरपुर शाकंरोर, हलवाना, नाईमजरा में भी मजलिस का आयोजन किया गया। मुजफ्फर हुसैन, नासिर हुसैन, शकील अब्बास, तैहवर हुसैन आदि रहे।