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हिन्दुतान के डीएनए में है धर्म निरपेक्षता - उपराष्ट्रपति

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सहारनपुर। भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि देश के प्रख्यात साहित्यकार कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर अपने साहित्य के माध्यम से जिंदगी लिखते थे, कभी निबन्ध के नाम से, कभी लघु कथा तो कभी अग्रलेख उनके लेखन का वास्तविक स्वरूप था । वे अपने सरल सहज लेखन से सीधे पाठक से जुड़ जाते थे। उनका साहित्य जिंन्दगी से उठता था और जिंन्दगी ही बांटता था ।
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उपराष्ट्रपति रविवार शाम कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर की 111 वी जयंती के अवसर पर आयोजित 14 वें शैलीकार सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता हिन्दुस्तान के डीएनए मे रची बसी है। यह न तो हमें संविधान से मिली है और न ही इसे नेताओं ने दी है। यहां के लोग सदियों से सर्वे भवंतु सुखिन और वसुधैव कुटुम्बकम में जीवन जीते आए हैं ।
उन्होंने प्रभाकर की स्मृति में स्थापित 14 वें शैलीकार सम्मान से देश की जानी मानी पत्रकार न्यूज 24 की मुख्य सम्पादक श्रीमती अनुराधा प्रसाद को पुष्पहार, शाल, मंगलकलश और प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। इससे पूर्व कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर के पुत्र एवं शैलीकार सम्मान समिति के अध्यक्ष अखिलेश मिश्र प्रभाकर ने सभागार में उपस्थित सभी आगंतुकों का स्वागत किया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में जुझारू सिपाही की भांति लड़ने वाले कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर ने देश आजाद होते ही सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर कलम की साधना को अपनाया और राजयोग का मोह त्याग कर अपनी विशिष्ट लेखन शैली से ऐसे साहित्य की सृजना की जो मानव और समाज के निर्माण में सहायक हो। उन्होंने कहा कि दिवंगत साहित्यकारों के नाम पर दिए जाने वाले सम्मान की परंपरा को व्यापक रूप दिए जाने की आवश्यकता है। ऐसे सम्मान नए साहित्यकारों को प्रेरणा भी देते हैं। इस अवसर पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि प्रभाकर जी का जीवन त्याग का रहा तभी तो देश आजाद होने पर सक्रिय राजनीति से सन्यास लेकर तपती पगडंडियों पर पदयात्रा करते हुए हिंदी साहित्य की सेवा में अपना जीवन लगा दिया। उन्होंने अनुराधा प्रसाद को शैलीकार सम्मान से सम्मानित होने को गर्व का विषय बताया। कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर की स्मृति में स्थापित 14 वें शैलीकार सम्मान से विभूषित होने पर अनुराधा प्रसाद ने कहा कि भारत के उपराष्ट्रपति द्रारा शैलीकार सम्मान गृहण कर गौरव का अनुभव कर रहीं हैं।
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समारोह के विशिष्ट अतिथि एवं फिल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने कहा कि कन्हैया लाल मिश्र प्रभाकर की पत्रकारिता में उनका लेखन पठनीय और सहज था उसमें कहीं भी दोहराव या उलझाव नहीं था । जीवन की संकरी गलियों से पाठक को सहजता से उसके लक्ष्य तक ले जाना उनके साहित्य की विशेषता थी । समारोह के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने अनुराधा प्रसाद को 14 वें शैलीकार सम्मान से विभूषित होने पर बधाई दी । इस अवसर पर केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, शीला दीक्षित, जतिन प्रसाद, राजीव शुक्ला, पदमश्री गीता चन्द्रन भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन शैलीकार सम्मान समारोह के सयोजक एवं प्रभाकर के पौत्र हर्ष प्रभाकर ने किया ।
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