पीछे छोड़, आगे दौड़ के फंडे पर अफसर
सहारनपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने के मामले में अधिकारी पीछे छोड़, आगे दौड़ के फंडे पर काम कर रहे हैं। मतलब यह है कि पहले चरण में ओडीएफ घोषित किए गए गांवों में सभी लोगों के घरों शौचालय बने नहीं और दूसरे चरण के 100 गांव को ओडीएफ घोषित किए जाने की तैयारी चल रही है।
केंद्र और प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में अक्तूबर 2018 तक 887 गांवों को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए सरकारी अमला लगा हुआ है। पहले चरण में 100 गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने का दावा प्रशासन चुका है और जल्द दूसरे चरण में फिर 100 गांव को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने की तैयारी चल रही है। मगर, हकीकत इसके विपरीत ही है। पहले चरण में ओडीएफ घोषित किए गांवों की हकीकत का अमर उजाला ने 14 सितंबर के अंक में खुलासा किया था। बलियाखेड़ी ब्लॉक के गांव लंढौरा जुनारदार निवासी राम सिंह के परिवार की महिलाओं ने बताया था कि उनके गांव को खुले में शौच से मुक्त होने का प्रशासन ने दावा किया। मगर उन समेत गांव में कई परिवार ऐसे है, जिनके घर में शौचालय बने ही नहीं हैं। ग्रामीण जंगल में शौच जाते हैं। इसी ब्लॉक के गांव खुर्द और आसनवाली में बनाए गए शौचालयों पर ताले लटके मिले थे।
पहले चरण में ओडीएफ घोषित हुए गांवों में पूरी तरह शौचालय का निर्माण नहीं हुआ और दूसरे चरण में 100 गांवों को ओडीएफ घोषित करने की तैयारी चल रही है। साफ है कि स्वच्छ भारत मिशन को पलीता लगाया जा रहा है। वहीं, मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल का कहना है कि गांव ओडीएफ घोषित करने की एक पूरी प्रक्रिया है। शासन से आई टीम के सर्वे के बाद ही गांव को ओडीएफ घोषित किया जाता है। अमर उजाला के माध्यम से गांव लंढौरा जुनारदार में पूरी तरह शौचालयों का निर्माण न होने की जानकारी मिली है, जिसे वह दिखवा रहे हैं।