स्वाइन फ्लू के तीन नए मामले मिले, अलर्ट जारी
सहारनपुर। मलेरिया और डेंगू के बाद अब स्वाइन फ्लू ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। शनिवार को तीन नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। एक ही परिवार में मां, बेटा और पुत्रवधु में स्वाइन फ्लू मिला है। उधर, जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए अलग से छह बेड का वार्ड बनाया है। जनपद में अभी तक स्वाइन फ्लू के नौ मामले सामने आ चुके हैं।
पिछले करीब दो महीने से जनपद में मलेरिया का प्रकोप फैला हुआ है। डेंगू के भी कई मामले सामने आए हैं। कुछ दिन से यह प्रकोप थोड़ा कम है, मगर अब स्वाइन फ्लू की दस्तक से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। शनिवार को स्वाइन फ्लू के दो नए मामले सामने आए हैं। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. शिवांका गौड़ ने बताया कि डेंगू के मरीजों का इलाज देहरादून में चल रहा है। इससे पहले छह मामले और सामने आए थे, जिनमें से दो मरीज ऐसे मिले, जो हैं तो सहारनपुर के लेकिन वे रहते मेरठ और देहरादून में हैं।
उन्होंने बताया कि नए मरीजों से वह खुद मिली हैं। चूंकि स्वाइन फ्लू फैलने वाला रोग है। ऐसे में मरीजों की पहचान गोपनीय रखी गई है। मरीजों के परिजनों की भी जांच कराई जा रही है। सीएमएस डॉ. सत्य सिंह ने बताया कि स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है। तमाम दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। मरीजों के लिए अलग से वार्ड भी तैयार किया गया है।
स्वाइन फ्लू से डरें नहीं, बचाव जरूरी
स्वाइन फ्लू को लोग जानलेवा बीमारी मानते हैं, जिसका खतरा इन दिनों बना हुआ है। मगर वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी की मानें तो स्वाइन फ्लू से डरने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि इस बीमारी से बचने के लिए बचाव जरूरी है। बताया कि स्वाइन फ्लू टाइप ए इन्फ्लूंजा वायरस एच-1 और एन-1 से होता है। यदि हम अहतियात बरतें तो स्वाइन फ्लू से बच सकते हैं। बताया कि जिन मरीजों में स्वाइन फ्लू की संभावना की जाती है उनका सैंपल पांच दिन के भीतर कलेक्ट करके भेजना चाहिए। स्वाइन फ्लू की दवा ओएसएलटामवीर (टेमीफ्लू) और जेनामवीर (विलेंजा) है। वर्तमान में 40 मिलियन टेमीफ्लू कैप्सूल देश में उपलब्ध है। ऐसे में स्वाइन फ्लू होने पर मरीज घबराए नहीं, बल्कि तुरंत अच्छे चिकित्सक से इलाज कराए।
स्वाइन फ्लू के लक्षण
- स्वाइन फ्लू के सामान्य लक्षण बुखार आना, मांसपेशियों में दर्द होना, खांसी और नाक का बहना, सिर दर्द होना, गले में खरास होना, डायरिया होना, उल्टी आना, भूख ना लगना और सांस लेने में परेशानी होना है।
स्वाइन फ्लू की जटिलताएं
- स्वाइन फ्लू जब जटिल अवस्था में पहुंच जाता है तो मरीज को न्यूमोनिया, ब्रोनकाइटिस, सइनोसाइटिस, कान में इंफैक्शन होता है। साथ ही फैफड़ों के फेल हो जाने की वजह से मरीज की मृत्यु हो जाती है।
इनको है अधिक खतरा
- 65 साल की उम्र पूरी कर चुके लोगों को।
- दमा और डायबिटीज के मरीजों को।
- सीओपडी के मरीजों को।
- दिल और किडनी के मरीजों को।
- एचआईवी के मरीजों को।
- बचाव के लिए यह करें
- खांसते और छींकते समय नाक और मुंह पर कपड़ा रखें।
- बलगम बहते पानी में डालें।
- संक्रमित व्यक्ति के कपड़े अलग रखें और अलग से धोएं।
- मुंह पर मास्क लगाएं।
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बेवजह जाने से बचें।
- किसी भी ग्रसित व्यक्ति के नाक, मुंह और आंखों को न छूएं।
- खांसी वाले व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें।