फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘...किसे मस्जिद बनानी है, किसे मंदिर बनाना है’

विज्ञापन
विज्ञापन
‘...किसे मस्जिद बनानी है, किसे मंदिर बनाना है’
विज्ञापन

देवबंद (सहारनपुर)। मौलिक अधिकार संघर्ष समिति की ओर से मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें उन शायरों और कवियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने पिछले दिनों दादरी में कराए गए मैराथन मुशायरे और कवि सम्मेलन में नगर का गौरव बढ़ाया है।
विज्ञापन

सोमवार रात बैरून कोटला में कार्यक्रम का शुभारंभ सपा नेता नकुल सिरोही ने फीता काटकर और सैयद हारिस ने शमां रोशन करके किया। शुऐब कुरैशी द्वारा सजाई गई महफिल में शम्स देवबंदी ने पढ़ा-‘चेहरे पे कोई चेहरा लगाना तो बड़ी बात, मैं बाल भी अपने कभी काले नहीं करता’। डा. नदीम शाद ने कहा- ‘वो खुदा से मांगता है आप क्यों नाराज हैं, वो शराबी है तो क्या उसको भी जन्नत चाहिए’। अब्दुल्लाह राज ने ‘पढ़ा न टूटने दिया कभी किसी का एतबार-ए-दिल, वे जिसके हो गए उसी के राज उम्रभर रहे.। फेमस खतौलवी ने सुनाया-‘तस्वीर मेरी खींच के बोला ये पत्रकार, लो कार्टून मिल गया अखबार के लिए’। नदीम अनवर ने पढ़ा- ‘मोहब्बतों में जरूरी है सब्र करना भी, तड़प तो पैदा ही कुछ दूर रहके होती है।’ चौकस देवबंदी ने कहा- उसे भी खींच लाई है मोहब्बत की कसक लेकिन, बुढ़ापे में उसे मुझ पर जो प्यार आया तो क्या आया। ताहिर मलिक रामपुरी ने पढ़ा- ‘फकत मुद्दा है ये उनका जिन्हें सत्ता की चाहत है, किसे मस्जिद बनानी है किसे मंदिर बनाना है।’ वली वक्कास ने कहा- ‘नहीं है इश्क ये माना मगर मैं कशमकश में हूं, बयां तुम सच नहीं करते या आंखें झूठ कहती हैंँ’ तारिक रामपुरी ने पढ़ा- ‘गिला हम क्या करें तारिक किसी की बदसलूकी का, हमें तो दो घड़ी आराम करके लौट जाना है’। इनके अलावा सूफी सईद अमरोहा, मास्टर फुरकान, सुहेल देवबंदी, राशिद कमाल सहित अन्य ने भी कलाम पेश किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति संरक्षक पंडित सतेंद्र शर्मा ने की। संचालन फेमस खतौलवी ने किया। इस मौके पर इदरीश अंसारी, जुनैद सिद्दीकी, गाजी वाजदी, फैसल नूर, मगफूर खान, डा. इसरार कुरैशी, मुफ्ती याद इलाही, पप्पू प्रधान, कलीम चौधरी, अय्यूब बेग, हमीद खान, असलम मुखिया, नबी सिद्दीकी, अनवर सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें