जमीयत उलमा-ए-हिंद एक अस्पताल खोले जाने का फैसला
देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद (देवबंद यूनिट) की बैठक में सर्वसम्मति से स्थानीय लोगों और मदरसा छात्रों को बेहतर उपचार मुहैया कराने के लिए नगर में एक अस्पताल खोले जाने का फैसला लिया गया। जिसके लिए चार सदस्यीय कमेटी की गठन भी किया गया।
रविवार को ईदगाह रोड पर आयोजित हुई जमीयत उलमा-ए-हिंद (मौलाना महमूद मदनी गुट) की बैठक की शुरुआत मो. अफ्फान की तिलावत-ए-कलाम पाक से हुई। कोषाध्यक्ष मौलाना हसीब सिद्दीकी ने कहा कि नगर के लोगों और मदरसा छात्रों को बेहतर उपचार मुहैया कराने के लिए संगठन के सदस्यों ने क्षेत्र में एक अस्पताल स्थापित किए जाने का फैसला लिया है। जिसके लिए चार सदस्यीय कमेटी की गठन भी किया गया है जो अस्पताल के लिए जमीन का चयन करेगी। कमेटी में जहीन अहमद, मौलाना इब्राहीम कासमी, चौधरी सादिक और डा. अब्दुल रहीम को रखा गया है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन के लिए आधुनिक सेवाओं से सुसज्जति अस्पताल लोगों की बुनियादी जरूरतों और महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में शामिल है। कहा कि देवबंद क्षेत्र में इस समय छोटे बड़े दीनी मदारिस बड़ी संख्या में हैं। जिनमें करीब 15 हजार से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। लेकिन इन मदरसों में छात्रों के इलाज के लिए किसी प्रकार की चिकित्सीय सुविधा नहीं है। इस समय नगर में डेंगू, मलेरिया, टाईफायड समेत अन्य बीमारियों से लोग पीड़ित हैं। इनमें बड़ी तादाद मदरसों छात्रों की भी है जो निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं। इसलिए जमीयत उलमा-ए-हिंद ने यह फैसला लिया है कि जल्द ही देवबंद में एक अस्पताल बनवाया जाएगा जिसमें नगरवासियों के साथ साथ मदरसों छात्रों को बेहतर और सस्ता उपचार मुहैया होगा। मौलाना दिलशाद और मौलाना हामिद ने भी विचार व्यक्त किए।