सहारनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को कमान पूरी तरह अपने हाथों में रखी। उन्होंने जिले और विधानसभा वार नेताओं और पदाधिकारियों की हाजिरी ली। सहारनपुर को छोड़कर कैराना, मुजफ्फरनगर और बिजनौर से पार्टी पदाधिकारी नदारद थे। बाकायदा उनके नहीं आने का कारण जानने के साथ मुजफ्फरनगर के सांसद को विदेशी दौरे कम और क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने की नसीहत दी। योगी यहां तक बोल गए कि कैराना समेत अन्य उप चुनावों में हुई गलतियों से सबक लेने की जरूरत हैं।
पीएनटी सेंटर के हाल में चार संसदीय क्षेत्रों के पदाधिकारियों और पार्टी नेताओं के बैठक की कमान सीधे योगी आदित्यनाथ के हाथों में रही। दीप प्रज्ज्वलन और स्वागत की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद योगी आदित्यनाथ ने खुद की माइक संभाल लिया। पहले उन्होंने जिले और विधानसभा वार कार्यकर्ताओं की हाजिरी ली। सहारनपुर के तमाम पदाधिकारी मौजूद मिले, जबकि कैराना, मुजफ्फरनगर और बिजनौर के 3 से लेकर पांच अधिकारी बैठक में मौजूद नहीं थे। सीएम ने एक कर उनके न आने का कारण पूछा। एक-एक पदाधिकारी का परिचय लेने के साथ उनकी जिम्मेदारी पर सवाल किए। बैठक में चारों जिलों के करीब 180 पदाधिकारियों को बुलाया गया था। शामली जिलाध्यक्ष पवन तरार बैठक में साढ़े ग्यारह बजे के करीब पहुंचे थे। योगी ने देरी का कारण पूछा तो बताया गया कि श्राद्ध का माह चल रहा है, इसलिए देरी हो गई। सीएम योगी ने मुजफ्फरनगर के भाजपा सांसद संजीव बालियान को विदेश के दौरे कम करने को कहा। इस समय क्षेत्र में काम करने के साथ समय दिए जाने की जरूरत है। सीएम ने कहा कि पुरानी गलतियों से सबक लेने की जरूरत है, ताकि कैराना उप चुनाव जैसी पुनरावृत्ति को टाला जा सके। करीब ढाई घंटे तक नेताओं और पदाधिकारियों को चुनावी टिप्स देते रहे। दूसरे नेताओं को बोलने का समय कम ही मिल पाया।
चुनाव लड़ने की करे तैयारी
चुनावी मंत्रणा में बूथ से लेकर सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार समेत तमाम पहलुओं पर चर्चा हुई, लेकिन प्रत्याशियों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। मुख्यमंत्री योगी ने वर्तमान जन प्रतिनिधियों से ही चुनाव की तैयारियों में जुट जाने को कहा। क्षेत्र में समीकरणों को लेकर पहले ही कील कांटों को दुरुस्त कर लिया जाए, ताकि भाजपा की जीत को सुनिश्चित किया जा सके।
आवास योजनाओं में उपेक्षा की शिकायत
सहारनपुर। मुजफ्फरनगर के भाजपा सांसद और पूर्व मंत्री संजीव बालियान ने प्रधानमंत्री आवास योजना में पश्चिमी यूपी में कम लोगों को आवासीय लाभ मिलने की बात कही। सीएम का जवाब था कि सर्वे के आधार पर पात्रों का चयन किया गया है।
अल्पसंख्यक मोर्चे को रखा गया अलग
सहारनपुर। चार संसदीय क्षेत्रों की समीक्षा बैठक में भाजपा के अलावा किसान प्रकोष्ठ, महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, बुनकर एवं कामगार प्रकोष्ठ समेत तमाम विंगों के पदाधिकारियों को बैठक में बुलाया गया था, जबकि भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ को चुनावी मंथन से पूरी तरह दूर रखा गया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनावी समीक्षा बैठक में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ को नहीं बुलाया गया था। हालांकि अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ से जुड़े पदाधिकारियों ने इसको को लेकर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।