बारिश ने किया बेघर, दूसरों के यहां ली शरण
सहारनपुर। तीन दिन से लगातार हो रही बारिश 17 जिंदगी लील चुकी हैं। बारिश का कहर सबसे ज्यादा कच्चे मकानों में रहने वालों पर टूटा है। शहर हो या देहात कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले हजारों परिवारों को रात जागकर काटनी पड़ रही हैं। अनहोनी की आशंका में कुछ परिवारों ने तो बच्चों को सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट कर दिया तो कुछ जगह पूरा परिवार ही शिफ्ट हो गया है।
दहशत का ऐसा माहौल 2013 में शहर और देहात आई बाढ़ के बाद पैदा हुआ था, जिसमें जनहानि तो कम, मगर धनहानि काफी हुई थी। शुक्रवार सुबह से शुरू हुआ बारिश के कारण मौतों का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। बारिश को लेकर जिस तरह अगले 48 घंटों का अलर्ट जारी किया गया है, उससे दहशत और बढ़ गई है। बारिश की वजह से एक बाद एक हो रहे हादसों ने जर्जर और कच्चे मकानों में रहने वाले हजारों परिवारों की नींद उड़ा दी है। उन्हें भी अनहोनी का डर सता रहा है। गंगोह के सांगाठेडा निवासी उषा देवी ने मकान के एक हिस्से की दीवार गिरने पर पड़ोसी के यहां शरण ली है। देवबंद निवासी कमलेश भी मकान कच्चा होने के कारण अपनी विवाहित बेटी के घर शिफ्ट कर दी गई है। लखनौती के शकरपुर में यामीन ने मकान गिरने के डर से अपना पूरा सामान पड़ोस में रख दिया है। यही स्थिति यमुना के तटवर्ती और ढमोला से सटे काफी लोगों ने अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर रख दिया है। ब्रजेश नगर निवासी राजीव ने बताया कि ढमोला नदी के उफान पर होने के कारण परिवार को दूसरे मकान में शिफ्ट कर दिया है। रात जागकर काटनी पड़ रही है, कहीं पहले की तरह पानी घर में ना घुस जाए। लोगों का कहना है कि यदि इस तरह बारिश होती रही तो बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है।
113 मकान गिरें
सहारनपुर। प्रशासनिक आंकड़ों के मुुताबिक जिले में अब तक 11 लोगों की मौत हुई हैं। इन मौतों में बारिश के कारण हुई करंट और पेड़ गिरने से हुई पांच मौत शामिल नहीं हैं। करीब 113 मकान छतिग्रस्त हुए हैं। इनमें कई की छत गिर गईं और कई की दीवारें जमींदोज हो गई है। छह लोग घायल हुए हैं जबकि दो अन्य की हालत गम्भीर है। यह है मुआवजा का प्रावधान
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार आदमी की मौत पर चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। लेकिन मुआवजे के लिए मारे गए व्यक्ति का पोस्टमार्टम होना जरूरी है। कच्चे मकान के गिरने पर 3200 रुपये और पक्के मकान के लिए मुआवजा राशि 5200 रुपये है। पूरा मकान गिरने पर 95100 रुपये का मुआवजा है।
इस तरह टूटा हादसे का कहर
सहारनपुर। जिले में पहली मौत तीतरों के हैदरनगर में जसबीर के रुप में हुई। रात में सोते समय मकान की छत गिरने से वह काल का ग्रास बन गया। दूसरी अनहोनी रामपुर मनिहारन के सोनू के साथ हुई। जलभराव के कारण आए करंट ने उसकी जिंदगी छीन ली। इसके बाद बारिश इस्लामनगर के सिंगा परिवार पर आफत बनकर बरसी। यहां सिंगा की पत्नी, पुत्रवधू और पौती की मौत हो गई। देर रात बेहट रोड़ पर बारिश के कारण टूटे पेड़ से टकराकर बाइक सवार तीन युवकों की मौत हो गई। शनिवार की सुबह गंगोह के फैजान की परिवार के पांच सदस्यों की मौत की खबर लेकर आई। एक परिवार के छह सदस्यों की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया है। लखनौती और नागल में एक-एक जिंदगी बारिश की भेंट चढ़ गई।
बारिश पर अलर्ट, दिन भर दौड़ते रहे अधिकारी
सहारनपुर। जनपद में लगातार हो रही बारिश के मद्देनजर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा गया है। दिन भर अधिकारी हादसों की सूचना पर दौड़ते रहे। शासन की सख्ती के चलते प्रशासन किसी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। दावा किया गया है कि आपदा प्रबंधन के लिए प्रशासन सेना और एनडीआरएफ टीम से संपर्क में है। आवश्यकता हुई तो हेलीकॉप्टर भी उपलब्ध कराया जाएगा। अपर जिलाधिकारी प्रशासन एसके दुबे ने बताया लेखपाल और प्रधान सहित अन्य अमले को अलर्ट कर दिया गया है। जनपद में दो सरकारी नाव के साथ लाइफ जैकेट भी उपलब्ध है। प्रशासन ने आपदाकाल के लिए सेना से भी संपर्क किया है। आवश्यकता पडने पर हेलीकॉप्टर भी उपलब्ध हो सकता है।