बाबरी मस्जिद का मामला अतिसंवेदनशील : मदनी
देवबंद (सहारनपुर)। बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि मुद्दे पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि यह कोई साधारण मामला नहीं है। बल्कि अतिसंवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसलिए इसे बहुसदस्यीय बेंच के हवाले कर देना चाहिए। ताकि मुकदमे के हर पहलू की बारीकी से जांच हो सके।
शनिवार को मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि मस्जिद की शरई हैसियत के संबंध में हमारे वकीलों ने जो बातें बेंच के सामने कही हैं वो एकदम दुरुस्त है। चूंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच पहले ही इस मुकदमे की सुनवाई कर चुकी है। इसलिए अंतिम समय में मुकदमे को बहुसदस्यीय बेंच के हवाले कर देना चाहिए। मदनी ने कहा कि कुछ लोग संगठनात्मक रुप से अदालत के बाहर इस मामले में गैर जरूरी बयानबाजी कर रहे हैं। यहां तक की कुछ जिम्मेदार लोग मीडिया के सामने आकर उसी स्थान पर मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं। जब मामला अदालत में विचाराधीन है तो इस प्रकार की बयानबाजी का क्या औचित्य है। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि अदालत खुद ही इस बात का नोटिस और जो लोग ऐसा कर रहे हैं उन्हें चेतावनी दें। क्योंकि इस तरह की बयानबाजी से समाज में बेचैनी फैल सकती है। मौलाना मदनी ने कहा कि मुसलमान एक देशभक्त नागरिक की तरह धैर्यपूर्वक अदालत के फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है और इस बात का यकीन है कि अदालत दूसरे मामलों की तरह इस अहम मुकदमे में भी सबूतों के आधार पर फैसला देगी, जबकि जो लोग गैर जरूरी बयानबाजी कर रहे हैं वो अपने व्यवहार से खुल्लम खुल्ला जता रहे हैं कि उन्हें न तो अदालत पर भरोसा है न ही उनकी नजर में अदालत की कोई इज्जत है। मदनी ने बताया कि दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों की सुनवाई के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई तक स्थगित कर दी है।