सरसावा (सहारनपुर)। ग्राम पिलखनी में मानव रहित रेलवे फाटक के स्थान पर दीवार बनाकर रास्ता बंद करने को लेकर दूसरे दिन भी जमकर हंगामा हुआ। ग्रामीण महिलाओं तथा बच्चों के साथ घंटों तक ट्रैक को घेरे बैठे रहे। इस दौरान एसडीएम का भी घेराव किया। बाद में एसडीएम की मध्यस्थता में प्रधान के साथ वार्ता के बाद रेलवे ने ग्रामीणों को 4 फुट का रास्ता इस शर्त पर देने की बात मानी कि इसमें ग्रामीण अपने रिस्क पर आवागमन करेंगे। जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए तो रेलवे कर्मचारियों ने दीवार बनाने के स्थान पर फौरन जेसीबी चलाकर काम आरंभ कर दिया।
रविवार के हंगामे के बाद सोमवार को भी ग्राम पिलखनी के ग्रामीण सुबह 7 बजे ही रेलवे ट्रैक पर आ जमे। वहीं पहले से ही सतर्क रेलवे पुलिस तथा स्थानीय पुलिस एवं प्रशासन ने ग्रामीणों को रेलवे ट्रैक से हटाकर दूर कर दिया। जिससे कोई ट्रेन प्रभावित नहीं हुई। हालांकि ग्रामीणों ने फाटक के स्थान पर दीवार बनाने आए मजदूरों को खदेड़ दिया तथा जेसीबी मशीन को रोक दिया। ग्रामीण लगातार रास्ते को खुला रखने की मांग करने लगे। इस बीच वहां पहुंची एसडीएम सदर संगीता का भी लोगों ने घेराव किया तो पुलिस ने सख्ती दिखायी। कई दौर की वार्ताओं के बाद एसडीएम संगीता की मध्यस्थता में ग्राम प्रधान सोमनाथ तथा रेलवे के अधिकारी मयंक गुप्ता के बीच 4 फुट का रास्ता पिलखनी के छोड़ने पर सहमति बन गई, लेकिन रेलवे के अधिकारियों ने प्रधान को साफ कहा कि ग्रामीण अपने रिस्क पर रास्ते का प्रयोग करेंगे। किसी भी दुर्घटना होने की दशा में रेलवे जिम्मेदार नहीं होगा। हालांकि गांव के लोगों ने प्रधान की बात भारी विरोध किया, लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद दोपहर दो बजे के करीब ग्रामीण ट्रैक से हट गए तो रेलवे के कर्मचारियों ने दीवार बनाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी। इस संबंध में एसडीएम सदर संगीता ने बताया कि ग्राम पिलखनी को 4 फुट रास्ता देने पर सहमति बन गयी है और बड़े वाहन औद्योगिक क्षेत्र रास्ते के आवागमन करेंगे।