सहारनपुर। मुखौटा कंपनियों के जरिए चीनी मिल खरीदने और मनी लांड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने करीब 17 घंटे तक पूर्व बसपा एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाल्ला के मकान में जांच की। बृहस्पतिवार तड़के ईडी की टीम मकान से बाहर निकली और मकान में मौजूद एक व्यक्ति को जांच के संबंध में एक पत्र पर हस्ताक्षर भी कराए। माना जा रहा है कि अहम साक्ष्य जुटाए गए हैं, जिसको लेकर निकट भविष्य में कड़ी कार्रवाई होने की संभावना है।
प्रवर्तन निदेशालय की टीम बुधवार को करीब दस बजे मिर्जापुर पोल स्थित हाजी इकबाल के मकान पर पहुंची थी, जबकि 11 बजे सहारनपुर शहर में साउथ सिटी में मुखौटा कंपनियों के निदेशक सौरभ मुकुंद के मकान पर दूसरी टीम ने छापा मारा था। दोनों ही जगह लंबी छानबीन चली। हालांकि जांच के दौरान ईडी की टीम को पूर्व एमएलसी के मकान से कौन कौन से दस्तावेज मिले, इसका अभी खुलासा होना बाकी है।
अलमारी से निकले साक्ष्य हो सकते हैं अहम
ईडी की टीम ने पूर्व एमएलसी के मकान में बुधवार को जब छानबीन की थी तो, एक अलमारी की चाबी नहीं मिल पाई थी। इसके चलते ताला खोलने वाले मिस्त्री को भी बुलवाया गया था। माना जा रहा है कि उस अलमारी से कई दस्तावेज मिले हैं, जो इस मनी लांड्रिंग और मुखौटा कंपनियों को लेकर केस से संबंधित अहम साक्ष्य हो सकते हैं।
पूर्व एमएलसी ने ईडी की कार्रवाई पर उठाए सवाल
सहारनपुर। बसपा के पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाल्ला ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि ईडी की टीम बिना किसी नोटिस व सूचना के उनके घर में पहुंची, टीम का व्यवहार बहुत निंदनीय है। जिस मामले को लेकर टीम पहुंची, उसमें उच्च न्यायालय में सुनवाई हो चुकी है। उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। हमारा मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों से कोई ताल्लुक नहीं है। वहीं, संविधान की जिस धारा 17 ए का जिक्र जांच को लेकर किया है, उसके अनुसार किसी प्राइवेट व्यक्ति की इस तरह जांच नहीं हो सकती है।