देवबंद (सहारनपुर)। बिहार के किशनगंज से कांग्रेस के सांसद व दारुल उलूम की मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना असरारुलहक कासमी ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरिराज सिंह के दारुल उलूम को लेकर दिए गए विवादित बयान की कड़ी निंदा की है। असरारुलहक कासमी ने गिरिराज सिंह को जहनी दिवालियापन का शिकार बताते हुए बयान को वापस लेने और माफी मांगे जाने की मांग की है।
बृहस्पतिवार को जारी बयान में मौलाना असरारुलहक कासमी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे बदजुबान मंत्रियों पर लगाम लगाए जो मुल्क के माहौल को खराब करने के लिए लगातार कोशिशें कर रहे हैं। मुल्क का मुसलमान इस प्रकार के बेबुनियाद बयानों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि एक मंत्री की ओर से इस तरह का बयान आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। शायद गिरिराज सिंह दारुल उलूम के इतिहास से परिचित नहीं हैं। उन्हें पता ही नहीं जब संघ और हिंदू महासभा जैसी तंजीमें अंग्रेजों की चापलूसी में व्यस्त थीं और देश को अंदरूनी तौर पर कमजोर करने की प्लानिंग कर रही थीं उस वक्त देवबंद ही था जिसने इस मुल्क की आजादी में हर किस्म की कुर्बानी दी और विदेशी प्रभुत्व को समाप्त करने में अहम किरदार अदा किया। उन्होंने कहा कि देवबंद और उलमा-ए-देवबंद हमेशा वतन से दोस्ती और वफादारी के अलंबरदार रहे हैं तथा उन्होंने देश को संवारने और इसको बनाने में महत्वपूर्ण किरदार अदा किया है। मौलाना असरारुलहक कासमी ने कहा कि दारुल उलूम, उलमा और यहां से फारिग होने वाले छात्र हर दौर में सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वह आज भी देश ही नहीं बल्कि विदेशों में देवबंद और मुल्क का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गिरिराज सिंह का बयान सरासर सियासी स्टंट है। क्योंकि चुनाव का समय नजदीक आ रहा है और इसी के चलते बीजेपी के नेता अपने सांप्रदायिक एजेंडे के साथ बाहर आ रहे हैं तथा जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। बता दें कि बुधवार को देवबंद पहुंचे गिरिराज सिंह ने बयान में कहा था कि देवबंद शिक्षा का नहीं बल्कि आतंक का मंदिर है। आतंकी हाफिज सईद और बगदादी यहीं के विद्यार्थी रहे हैं।