सहारनपुर। रोडवेज में कर्मचारियों को जून में दो बार जारी किए गए वेतन और फिर खाता सीज कराने के मामले में एआरएम वित्त के अलावा तीन डिपो के कर्मचारियों और एक क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय के कर्मचारी पर लापरवाही की गाज गिरनी तय है।
इन कर्मचारियों ने बिना चेक किए ही कर्मचारियों के खातों में वेतन रिलीज कर दिया। रोडवेज एआरएम वित्त ने जून का वेतन कर्मचारियों को दो बार जारी कर दिया। वेतन लिपिकों ने भी बिना जांच के ही वेतन बना दिया और बैंक ने सिर्फ एक व्यक्ति के हस्ताक्षर से ही एक ही चेक का दो बार भुगतान कर दिया। इसमें लगभग 48 लाख रुपये का घपला हो गया। यह वेतन 391 कर्मचारियों के खातों में भेजा गया। मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचा। क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार ने एआरएम वित्त रंजीत गुुप्ता को जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। जिससे उन पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। इसके अलावा खतौली डिपो, मुजफ्फरनगर डिपो एवं सहारनपुर डिपो के वेतन लिपिकों के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय के कर्मचारी की भी बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। चारों कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
जुलाई के वेतन से होगी रिकवरी
क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार का कहना है कि चार लिपिकों की लापरवाही सामने आई है। दोबारा वेतन कैसे बना दिया गया। चारों पर कार्रवाई की जाएगी। जबकि एआरएम वित्त पर कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों द्वारा निर्णय लिया जाएगा। दो बार जारी किए गए वेतन की रिकवरी जुलाई के वेतन से करा ली जाएगी।
बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए मुख्य प्रबंधक को भेजा पत्र
इस गड़बड़ी में बड़ी भूमिका बैंक के अधिकारियों की मानी जा रही है। बैंक अधिकारियों ने पहले तो तकनीकी गड़बड़ी बताकर कर्मचारियों का वेतन रोक दिया। जब फिर से वेतन जारी करने का पत्र भेजा गया, तो बैंक ने पहले आदेश का भी वेतन खातों में भेज दिया और दूसरे का भी वेतन भेज दिया। यह है मामला
परिवहन निगम द्वारा जून माह का वेतन 474 कर्मचारियों के खातों में लगभग 60 लाख रुपये जारी किया गया। लेकिन बैंक द्वारा तकनीकी खराबी आने के चलते 81 कर्मचारियों का वेतन उनके खातों में जाने के स्थान पर बैंक में वापस आ गया। इस पर एआरएम वित्त ने केवल 81 कर्मचारियों को वेतन जारी करने के बजाय बैंक को चेक की धनराशि को दोबारा भुगतान करने की संस्तुति कर दी। बैंक ने 391 कर्मचारियों के खाते में दोबारा वेतन भेज दिया। इससे रोडवेज को 48 लाख 67 हजार चार सौ 55 रुपये कर्मचारियों के खातों में अधिक पहुंच गया। मामला खुलने पर सभी कर्मचारियों के बैंक खातों को सीज करा दिया गया।