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कैराना हार पर मुख्यमंत्री के तेवर कड़े, मंत्री धर्म सिंह और विधायक प्रदीप लखनऊ तलब

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कैराना हार पर मुख्यमंत्री के तेवर कड़े
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सहारनपुर। कैराना उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी हार के बाद भाजपा हाईकमान के तेवर कड़े नजर आ रहे हैं। शाम को परिणाम आते ही दोनों विधानसभाओं नकुड़ एवं गंगोह से विधायक मंत्री डाक्टर धर्म सिंह सैनी और विधायक प्रदीप चौधरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ तलब कर लिया। दोनों सुबह ही लखनऊ पहुंच गए। हार के लिए दोनों से जवाब मांगा जा रहा है और हार के कारणों की समीक्षा की जा रही है। अंदेशा जताया जा रहा है कि इस हार पर कई भाजपा के बड़े नेताओं पर गाज गिर सकती है।
कैराना लोकसभा उपचुनाव गठबंधन के लिए ही नहीं भाजपा के लिए भी प्रतिष्ठा का चुनाव बन गया था। जिसमें बाजी गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम ने मारी। भाजपा प्रत्याशी की करारी हार से भाजपा हाईकमान सकते में है और हार की समीक्षा भी शुरू कर दी है। सहारनपुर की दोनों विधानसभाओं नकुड़ एवं गंगोह के विधायकों प्रदेश में मंत्री डाक्टर धर्मसिंह सैनी और विधायक प्रदीप चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में रालोद गठबंधन प्रत्याशी को बड़ी संख्या में वोट मिले और भाजपा प्रत्याशी मृगांका को हार का मुंह देखना पड़ा। यह हाल तब रहा, जब भाजपा हाईकमान ने मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की फौज को पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांगने के लिए मैदान में उतार रखा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की जनसभा आयोजित की गई। इसके बावजूद भी पार्टी प्रत्याशी को भाजपाई जीत नहीं दिला सके।
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हार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्री डाक्टर धर्म सिंह सैनी और विधायक प्रदीप चौधरी को लखनऊ तलब कर लिया। शुक्रवार को ही डाक्टर धर्म सिंह सैनी और प्रदीप चौधरी लखनऊ पहुंच गए। भाजपा सूत्रों के अनुसार दोनों से इस हार पर जवाब तलब किया जा रहा है। साथ ही क्षेत्र के अन्य नेताओं के साथ बैठक कर हार की समीक्षा भी की जा रही है। चर्चा है कि पार्टी के कई बड़े नेताओं पर कार्रवाई हो सकती है। विधायक प्रदीप चौधरी ने बताया कि उन्हें लखनऊ बुलाया गया है। हार के कारणों को लेकर सीएम होगी। कैराना उपचुनाव में जो गलतियां हुई हैं। उनसे सबक लेकर 2019 के चुनाव की तैयारी की जाएगी।
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-- अफसरों में बेचैनी, विकास कार्यों को लेकर हुए अलर्ट
सहारनपुर। कैराना उपचुनाव खत्म होने के बाद अफसरों में भी बेचैनी का आलम है। यही कारण है कि शुक्रवार को विकास कार्यों को लेकर संबंधित विभागों को कड़े निर्देश दिए गए। साथ ही सरकार की योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने की ताकीद की गई। पिछले दिनों भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी कि उनकी सरकार में अधिकारी उनकी नहीं सुनते हैं। जनता के कार्य करने में पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी दिलचस्पी नहीं दिखाते, जिससे लोगों में सरकार की छवि खराब हो रही है। इसी वजह से अब अफसरों को कार्रवाई का डर सता रहा है। भाजपा जिलाध्यक्ष बिजेंद्र कश्यप का कहना है कि कार्यकर्ताओं की अनदेखी हार की बड़ी वजह रही। मुख्यमंत्री से अधिकारियों की गलत कार्यप्रणाली की शिकायत की गई है।
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