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शिवालिक वन प्रभाग बनेगा बाघ संरक्षण क्षेत्र
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सहारनपुर। बाघों की निरंतर घटती संख्या को देखते हुए देश भर में बाघ बचाने की मुहिम चल रही है। इसी क्रम में सहारनपुर की परिधि में आने वाले शिवालिक क्षेत्र जल्द ही बाघ संरक्षण क्षेत्र घोषित करने की तैयारी चल रही है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने चार राज्यों के वन क्षेत्रों को मिलाकर इस दिशा में काम शुरू कर दिया है।
शिवालिक वन प्रभाग में हाथी, बाघ, तेंदुआ समेत अनेक वन्य जीव पाए जाते हैं। यमुना किनारे एक स्थल ऐसा है, जहां चार राज्यों क्रमश: हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमाएं मिलती हैं। कलेसर से लगे हिमाचल प्रदेश के सिंबलवाड़ा राष्ट्रीय उद्यान के कारण चारों राज्यों में फैले इस अनूठे लैंडस्केप में बाघ, तेंदुआ, हाथी और अनेकानेक वन्य जीव पाए जाते हैं। इसी कारण हाल ही में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने इन चारों वन क्षेत्रों को मिलाकर बाघ संरक्षण की दृष्टिगत एक अंतरराज्यीय व्याघ्र संरक्षण बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि इन चार राज्यों में उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग ही वन्य जीव अभ्यारण अथवा राष्ट्रीय संरक्षण नहीं है।
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शिवालिक वन प्रभाग में पाए जाने वाले जीव
शिवालिक वन प्रभाग में बाघ, हाथी, भालू, तेंदुआ वास करते हैं हैं। पक्षियों में ग्रेट, हॉर्नबिल, स्टोन, क्रीपर्स, नटहैच, मुनिया, पराकीट्स, ड्रॉगो, फ्लाईकैचर, बुशचैट, ट्रीपाई, वैबलर्स आदि बर्ड्स बड़ी संख्या में हैं।
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मुख्य वन संरक्षक रमेश पांडेय का कहना है कि बाघों के संरक्षण के लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पड़ने वाले शिवालिक वन क्षेत्र को मिलाकर अंतरराज्यीय व्याघ्र संरक्षण बनाने की दिशा में काम कर रही है।
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