दो बार काया कल्प का अवार्ड लेने वाला अस्पताल हुआ बदहाल
छुटमलपुर (सहारनपुर)। श्रेष्ठ चिकित्सा सेवाओं के लिए दो बार का कायाकल्प अवार्ड लेने वाले फतेहपुर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इस समय बदहाल स्थिति में है। शासन और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर हो रही अनदेखी के कारण यहां रोगियों के लिए न तो पर्याप्त चिकित्सक हैं औरर न ही डिजिटल एक्सरे जैसी मशीनों को आपरेट करने के लिए तकनीशियन। बरसात का मौसम आ रहा है और अस्पताल की छत की हालत ठीक नहीं है। बरसात होने पर यह टपकने लगती है। ब्लड स्टोरेज यूनिट भी है, मगर यह भी संचालित हालत में नहीं है।
इस सीएचसी को वर्ष 2016-17 और 17-18 में बेस्ट अस्पताल के लिए काया कल्प का अवार्ड लगातार मिल चुका है और आयुष्मान योजना में भी यह मुजफ्फराबाद ब्लाक का अकेला नामित अस्पताल है। बावजूद इसके विभागिय अनदेखी के चलते यह बदहाली का शिकार हो गया है। 30 बिस्तर वाले फतेहपुर सीएचसी को करीब पांच साल पूर्व एफआरयू का दर्जा दिया गया था। उसके बाद यहां ब्लड स्टोरेज यूनिट और नवजात शिशु वार्ड तक बनाया गया था। लेकिन स्टाफ की तैनाती के अभाव में ये आज तक नहीं चल सके हैं। पैथोलाजी लैब में आटो एनालाइजर जनवरी में आ गया था। लेकिन यह भी काम नहीं कर रहा है। पिछले माह अस्पताल में डिजिटल एक्स रे की मशीन स्थापित की गई थी। तकनीशियन न होने के कारण यह धूल फांक रही है। रोगियों को एक्स रे के लिए बाहर जाना पड़ता है। केंद्र पर बाल रोग विशेषज्ञ, महिला और पुरुष दोनो सर्जन के पद रिक्त पड़े हैं। हाइवे की सीएचसी होने के कारण आए दिन दुर्घटना के शिकार यहां पहुंचते हैं लेकिन सभी को हायर सेंटर भेजना पड़ता है। कई बार समय पर उपचार के अभाव में मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं।
हर माह 150 प्रसव, सीजेरियन डिलीवरी की व्यवस्था नहीं
- छुटमलपुर। केंद्र पर एक माह में 125 से 150 प्रसव होते हैं। लेकिन सीजेरियन डिलीवरी की यहां व्यवस्था नहीं है। स्टाफ नर्स भी यहां तीन ही तैनात हैं। पूरे केंद्र की व्यवस्था एक चौकीदार और एक वार्ड ब्वाय के भरोसे है। अस्पताल की छत बारिश के बाद कई जगह से टपकती है। ओटी और लेबर रूम तक इससे बचे नहीं हैं। साल भर में एक लाख से ज्यादा रोगी यहां ओपीडी में उपचार कराने पहुंचते हैं।
करोड़ों की लागत से बना मातृ शिशु अस्पताल बंद
सीएचसी कैंपस में ही करीब पौने चार करोड़ रुपये की लागत से मातृ एवं शिशु चिकित्सा के लिए 30 बिस्तर का तीन मंजिला अस्पताल बनाया गया था। दिसंबर 2017 में यह निर्माण इकाई द्वारा स्वास्थ्य विभाग के हैंडओवर कर दिया गया था। लेकिन यह आज तक चालू नहीं हो सका है। पिछले डेढ़ साल से यह बंद पड़ा है। इसमें जरूरी उपकरण और मशीनें नहीं लग सकीं। स्टाफ की तैनाती भी इस अस्पताल में अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में इसकी इमारत धूल फांक रही है।
अस्पताल की दो इमारतों पर है दूसरे विभागों का कब्जा
अस्पताल परिसर में स्थित स्वास्थ्य विभाग की दो इमारतों में से एक पर रेशम विकास विभाग के उप निदेशक का कार्यालय चल रहा है तथा दूसरी पर बाल विकास विभाग मुजफ्फराबाद की सीडीपीओ का दफ्तर है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नवदीप गुप्ता ने बताया कि वे काफी समय से दोनो इमारतों को खाली कराने के लिए प्रयासरत हैं। लेकिन संबंधित विभाग के अफसर उन्हें खाली नहीं कर रहे हैं, जबकि इन इमारतों की अस्पताल को बेहद जरुरत है।
चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी बड़ी परेशानी : गुप्ता
- सीएचसी की बदहाली पर चिकित्सा अधीक्षक डा नवदीप गुप्ता का कहना है कि जरूरी चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी के कारण यह हालात बने हैं। चिकित्सकों और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी पूरा कराने के लिए प्रशासन और शासन से लगातार संपर्क चल रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति बदलेगी।
अस्पताल की छत की मरम्मत के लिए संबंधित एई को कहा गया है। मैन पावर के अभाव में सीएचसी में पर्याप्त स्टाफ तैनात नहीं हो पा रहा है। नए अस्पताल में भी इसी वजह से स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है। शासन को इन सबके बारे में लिखा गया है। रही बात सर्जरी की तो केंद्र पर बाहर से सर्जन बुलवा कर सर्जरी कराने की अनुमति दे रखी है जिसका भुगतान विभाग द्वारा किया जाएगा।
- डॉ. बीएस सोढी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहारनपुर