नकुड़ और गंगोह में बेअसर रहा गठबंधन
सहारनपुर। सपा, बसपा और रालोद के गठबंधन लोकसभा चुनाव में सहारनपुर सीट पर तो असर कर गया था, लेकिन कैराना लोकसभा सीट के गंगोह और नकुड़ विधानसभा क्षेत्र में बेअसर साबित हुआ। यही वजह है कि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में इन दोनों क्षेत्रों में पीछे रही भाजपा इस चुनाव में गठबंधन से आगे निकल गई।
दरअसल, लोकसभा चुनाव के लिए सपा, बसपा और रालोद ने परंपरागत वोटरों को सहेजकर जीत हासिल करने का लक्ष्य बनाया था। सहारनपुर लोकसभा सीट पर सर्वाधिक मतदाता करीब साढ़े छह लाख मुस्लिम हैं, तो उसके बाद अनुसूचित जाति वर्ग के करीब साढ़े तीन लाख मतदाता बताए जाते हैं। यही समीकरण था गठबंधन का, जिसके भरोसे जीत दर्ज की जानी थी। सहारनपुर लोकसभा सीट पर आए परिणाम ने यह साबित भी कर दिया कि यहां गठबंधन कामयाब रहा।
वहीं, कैराना लोकसभा सीट के दो विधानसभा क्षेत्र नकुड़ और गंगोह भी सहारनपुर जनपद में हैं, लेकिन इन दोनों क्षेत्रों में गठबंधन बेअसर साबित हुआ। यह बात लोकसभा चुनाव 2019 और उपचुनाव 2018 के परिणाम से स्पष्ट दिखाई देती है। क्योंकि कैराना सीट के उपचुनाव में गठबंधन से रालोद प्रत्याशी को नकुड़ और गंगोह क्षेत्र में 2,22,752 वोट मिले थे, जबकि भाजपा को 1,82,372 वोट हासिल हुए थे। वहीं, अब लोकसभा चुनाव हुआ, तो उसमें गठबंधन से सपा प्रत्याशी को इन दोनों क्षेत्रों में 222463 वोट प्राप्त हुए, जबकि भाजपा को 248661 वोट मिले हैं। इस लिहाज से भाजपा को इन दोनों क्षेत्रों में 26,198 वोट अधिक प्राप्त हुए, जबकि कैराना सीट के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को गठबंधन प्रत्याशी से 40,380 वोट कम मिले थे। वहीं जातीय संघर्ष से प्रभावित गांव में शब्बीरपुर में भाजपा को 1112 और बसपा को 573 वोट मिले थे।
सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र में यादव बहुलता वाले कुछ गांव हैं। इनमें गांव खजूरी अकबरपुर में बसपा को 1341 वोट मिले, जबकि भाजपा को भी 592 वोट मिले, वहीं कांग्रेस को 265 वोट हासिल हुए। यादव बहुलता वाले चौरादेव गांव में कांग्रेस को 33, बसपा को 1087 और भाजपा को 653 वोट मिले। देवबंद विधानसभा क्षेत्र में जाट बहुलता वाले गांव पनियाली में कांग्रेस को 99 वोट, बसपा को 433 वोट और भाजपा को 1108 वोट हासिल हुए। इसके अलावा रामपुर मनिहारान विधानसभा क्षेत्र के अनुसूचित जाति वर्ग बहुल गांव बडेढी में कांग्रेस को 531 वोट, बसपा को 606 वोट और भाजपा को 393 वोट प्राप्त हुए।
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सपा जिलाध्यक्ष चौधरी रुद्रसैन का कहना है कि गठबंधन टूटने या बने रहने की कोई जानकारी नहीं है। पार्टी अध्यक्ष का जो निर्णय होगा, वह माना जाएगा।
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बसपा जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह का कहना है कि पार्टी प्रमुख ने लोकसभा चुनाव की समीक्षा के बाद अपनी बात कही है। गठबंधन को लेकर हम कुछ नहीं कह सकते हैं, बहनजी जो फैसला करेंगी वह माना जाएगा।
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