सहारनपुर। जिला महिला अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्डों में अब कोई व्यक्ति यहां तक की तीमारदार भी बिना पास के एंट्री नहीं कर सकेगा। अस्पताल प्रशासन ने एंट्री के लिए पास की व्यवस्था लागू की है। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि एक मरीज के साथ एक या अधिकतम दो तीमारदार रहने चाहिएं। इससे अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था बनाने में आसानी होगी। साथ ही किसी प्रकार की घटना होने की आशंका भी कम रहेगी।
महिला अस्पताल से हर साल नवजात बच्चा चोरी होने या बच्चा बदलने की गंभीर घटनाएं होती रही हैं। जच्चा-बच्चा वार्ड में अभी तक एक जच्चा-बच्चा के साथ आठ से दस तक लोग रहते हैं। कई बार वार्ड के भीतर महिला के बेड पर ही पुरुषों के बैठे होने की वजह से कक्ष में भर्ती अन्य महिलाओं को बच्चों को दूध पिलाने आदि में परेशानी रहती है। कई तीमारदार भर्ती महिला के बेड पर बैठकर ही भोजन करते हैं। इसकी वजह से गंदगी फैलती है। इन तमाम अव्यवस्थाओं और घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए महिला अस्पताल प्रशासन ने एंट्री पास की व्यवस्था की है। अब अस्पताल का काउंटर से तीमारदारों को एंट्री पास जारी किए जा रहे हैं। पास जारी करने से पहले तीमारदार से मरीज का नाम तथा मरीज के साथ उसके संबंध के बारे में पूछताछ की जाती है। रजिस्टर में नाम दर्ज करने के बाद पास जारी किया जा रहा है। मंगलवार को जच्चा-बच्चा वार्डों के गेट पर कर्मचारी तैनात रहे, जिन्होंने बिना पास के किसी व्यक्ति को एंट्री नहीं दी। इससे वार्डों में भीड़ कम रही और साफ-सफाई भी अन्य दिनों की तुलना में अधिक नजर आई।
महिला अस्पताल में व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के लिए जच्चा-बच्चा वार्डों में एंट्री के लिए पास की व्यवस्था की है, जिसे लागू कर दिया गया है। पहला दिन काफी राहत भरा रहा है। अब एक मरीज के साथ एक या अधिकतम दो लोगों को एंट्री देंगे। तीमारदारों को भी चाहिए वह व्यवस्था बनाने में सहयोग करें। -- डॉक्टर अनीता जोशी, सीएमएस, महिला अस्पताल।