भजनों की प्रस्तुतियों पर झूमते रहे श्रद्धालु
सहारनपुर। पंत विहार स्थित सरस्वती सत्संग भवन के वार्षिकोत्सव पर आयोजित पांच दिवसीय सत्संग का समापन किया गया। इसमें भजनों की प्रस्तुतियों पर श्रद्धालु झूमते रहे। भजनों में गुरु से लेकर प्रभु का गुणगान किया गया।
बुधवार को कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीश्री 108 स्वामी रामानंद सरस्वती महाराज की आरती के साथ किया गया। कार्यक्रम में देवी सुदीक्षा महाराज ने कहा कि सतगुरु अपने शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। दीप्ति बहन ने गुरुदेव की महिमा का गुणगान किया। इसके बाद सौरव मदान, केशव सेठ, भरत मिगलानी, अंकित मक्कड़ और वासु छाबड़ा ने भजन प्रस्तुत किए। देवी सुदीक्षा महाराज ने कहा कि स्वभाव सबका अलग-अलग होता है। इसी स्वभाव के अनुरूप ही व्यक्ति का प्रभाव बनता है। उन्होंने कहा कि जब प्रभु श्रीराम का राज तिलक हो गया तो सुग्रीव और वानर अपने राज्य की ओर प्रस्थान कर गए। लेकिन हनुमान जी अयोध्या में ही रह गए। श्री राम ने सभी भाइयों और साथियों को राज्य के कार्य हेतु पद बांट दिए। उन्होंने हनुमान से पूछा कि तुम्हें कौन सा पद चाहिए। तब हनुमान ने श्री राम से कहा कि मुझे आपके दो पद यानी चरण चाहिएं। मैं इनकी सेवा करना चाहता हूं।
इस दौरान राजीव कालिया, संजीव जसूजा, सुधीर मिगलानी, कृष्ण लाल मक्कड़, राजेश खुराना, इंद्रजीत जसूजा, मानस कपूर, गौतम चानना, सुरेश गाबा, राजीव कालड़ा, संदीप खुराना, अशोक मक्कड़, अक्षय अग्रवाल मौजूद रहे।