कृषकों को गन्ना उत्पादन बढ़ाने व कीट रोगों से बचाव की जानकारी दी
देवबंद (सहारनपुर)। खंड विकास कार्यालय में बुधवार को किसान कल्याण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें कृषकों को गन्ना उत्पादन बढ़ाने तथा कीट रोगों से बचाव की जानकारी दी गई।
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक विनोद कुमार ने किसानों से स्वीकृत गन्ना प्रजातियों की बुवाई करने का आह्वान किया। बसंत माह में काटे गए गन्ने में निकले किल्ले नहीं छोड़ने चाहिए। परंतु अप्रैल व मई में काटी गए गन्ने में उन किल्लों को रखने से पेड़ी की उपज बढ़ती है। गन्ने की कटाई जमीन से सटाकर करनी चाहिए। सिंचाई करने के बाद ओट आने पर लाइनों के बीच हल चलाकर पुरानी जड़ों की कटाई कर देनी चाहिए। पेड़ी में जड़े उखली होने के कारण सिंचाई 10-15 दिन के अंतराल पर करनी चाहिए। गन्ने की दो पंक्तियों के बीच सुखी पत्तियां बिछा देनी चाहिए। इससे खेत की नमी तो संचित रहती है साथ की खरपतवार भी नष्ट हो जाते हैं। चीनी मिल के गन्ना प्रबंधक डा. बीएस तोमर ने कृषकों को काले चिट्टे, दीमक एवं बोरर आदि के प्रकोप वाले क्षेत्रों में कीटनाशक दवा की छिड़काव करनी चाहिए। गन्ना पेड़ी में पूर्व में प्रचलित यूरिया के स्थान पर घुलनशील एनपीके का छिड़काव जरूरी है। गन्ना विकास निरीक्षक विक्रम सिंह ने राष्ट्रीय कृषि विकास एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। कार्यशाला में सहेंद्रपाल सिंह, गोपीचंद डाबरा, आनंद कुमार, नासिर खां, सुल्लर सिंह, सतीश त्यागी, कुलदीप कुमार, श्रवण कुमार, राजेंद्र त्यागी, राजपाल सिंह, ईश्वर सिंह, अमिताभ सिंह, राजेश्वर, सोनू कुमार आदि रहे।