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...मां जो घर की रानी थी अब नौकरानी हो गई

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...मां जो घर की रानी थी अब नौकरानी हो गई
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बेहट। उर्दू अदब संस्था बज्मे निदाए उर्दू के तत्वावधान में शेरी नशिस्त का आयोजन किया गया, जिसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
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उस्ताद शायर इदरीश वासिल ने पढ़ा हमने कुदरत का अजब ये करिश्मा देखा, एक शंहशाह के हाथों में कासा देखा, तनवीर अफजल ने पढ़ा जो रंजिशों में बहाते हैं हम लहू अजमल, ये सरहदों पे बहाते तो बात बन जाती। शादाब नियाजी ने पढ़ा, मुद्दत के बाद आए हैं वो सामने मेरे, दिल खुश तो हो गया मगर आंख भर आई। डॉ. साबिर बेहटवी ने पढ़ा शादियां बेटों की करके ये कहानी हो गई, मां जो घर की रानी थी अब नौकरानी हो गई। फय्याज अहमद फय्याज ने पढ़ा शबे फुरकत की जुल्मत से मेरा दिल जब भी घबराया, तसव्वुर में तुझे लाकर उजाला कर लिया मैने। मिर्जा खालिक ने पढ़ा वो मुझे रुसवा शहर में कबूल करता रहा, पर मेरा किरदार मुझको सुर्खरू करता रहा। आतिफ कुरैशी ने पढ़ा क्यूं भुला दिया आतिफ उसने तेरी उल्फत को, ये सवाल मेरा दिल बार-बार करता है। इस मौके पर अलीजान, कदीर कुरैशी, कबीर, मुस्तफा, नादिर शेख, आमिर, सुफियान, नाहिद, मियां पीरू, मोहम्मद अहमद काजमी आदि की मौजूदगी रही।
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