सहारनपुर। 2017 में भी सहारनपुर विकास प्राधिकरण विकास को गति नहीं दे सका। आलम यह रहा कि विकास प्राधिकरण की शह पर पूरे साल केवल अवैध निर्माण होते रहे। अनगिनत भूखंडों पर अवैध कॉलोनियां काट दी गईं, मगर कार्रवाई चंद ही हुईं, जिसकी वजह से प्राधिकरण के अफसरों की नीयत पर हमेशा की तरह सवाल उठते रहे। आलम यह है कि अफसरों की नाक के नीचे आज भी अवैध निर्माण जारी हैं, जिनपर कार्रवाई करने की हिम्मत प्राधिकरण के अफसर तक नहीं जुटा पा रहे हैं या फिर कार्रवाई करना नहीं चाह रहे हैं।
विकास प्राधिकरण का गठन करीब 20 वर्ष पहले हुआ। अभी तक प्राधिकरण एक भी काम सुनियोजित ढंग से नहीं कर सका है। वर्ष 2017 भी ऐसे ही बीता है। मार्च 2017 में वेदप्रकाश वीसी पद से रिटायर हुए, जिनके बाद मनोज कुमार वीसी बनकर यहां आए। उम्मीद थी कि निजाम बदलने के बाद व्यवस्था में बदलाव आएगा, मगर नहीं। उसके बाद भी प्राधिकरण लकीर का फकीर बना नजर आया है। जहां कहीं की शिकायत मिली तो कार्रवाई की गई, अन्यथा सब कुछ पुराने ढर्रे पर ही चलता रहा। वर्तमान में शहर के चारों ओर 200 से अधिक अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। शकलापुरी रोड पर एक अवैध कॉलोनी है, जिसमें तीन मंजिला इमारत खड़ी है। आधा दर्जन से अधिक मकानों की दीवारें खड़ी हैं, मगर प्राधिकरण ने केवल एक अधूरे निर्माण को ध्वस्त किया और कुछ सड़कें उखाड़ीं, जबकि बाकी निर्माण ऐसे ही खड़ा हैं। सवाल यह है कि अवैध कॉलोनी में कोई भी निर्माण कैसे वैध हो सकता है। यदि सब अवैध हैं तो बाकी को क्यों छोड़ा गया। इसी प्रकार कमिश्नर आवास की बगल में बहुमंजिला कामर्शियल भवन तैयार किया गया, जिसका दस से 12 फीसदी हिस्सा अवैध पाया गया। इस अवैध निर्माण को तोड़ने के आदेश जारी हुए थे, मगर आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। आलम यह है कि उक्त इमारत को दुरुस्त कर कंपलीट किया जा रहा है। दिल्ली रोड पर कॉशमॉश सिटी कॉलोनी का मानचित्र स्वीकृत करने में भी बड़ी धांधलेबाजी सामने आ रही है। इसके मानचित्र को स्वीकृति दी गई है, मगर वीसी की मुहर के साथ उनके हस्ताक्षर तक नहीं हैं। प्राधिकरण की बगल में अवैध निर्माण हो रहे हैं, जिनपर पता होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
आवासों के लिए जमीन तक नहीं तलाश सका प्राधिकरण
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहारनपुर में शहरी गरीबों के लिए 550 आवास बनाए जाने हैं, जो फ्लैट की तरह होंगे। करीब छह महीने पहले इसकी घोषणा हुई थी। तब प्राधिकरण को आवास के लिए जमीन की तलाश करने को कहा था। मगर आज तक प्राधिकरण जमीन नहीं तलाश सका है। ऐसे में गरीबों को ढाई लाख रुपये में फ्लैट मिलने का सपना टूटता नजर आ रहा है।
एक-दूसरे की टांग खींचते रहे अधिकारी
विकास प्राधिकरण के अधिकारी शहर का सुनियोजित विकास करने और अवैैध कॉलोनियों और निर्माण पर रोक लगाने की बजाय एक-दूसरे की टांग खींचते नजर आए। कमिश्नर रहे एमपी अग्रवाल ने रात में छापा मारकर अभियंताओं की अलमारियों के ताले तुड़वाकर फाइलें जब्त की थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद वीसी मनोज कुमार ने भी कुछ अभियंताओं की अलमारियों से फाइलें निकालकर जांच कराई। फाइलों की जांच किस नतीजे पर पहुंची, आज तक किसी को पता नहीं चल सका है। न ही किसी अभियंता के खिलाफ अभी तक किसी तरह की कार्रवाई अमल में लाई गई है। इतना ही नहीं, प्राधिकरण के एक लिपिक तक ने वीसी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ऊपर शिकायत की हुई है।
विकास प्राधिकरण की कार्यशैली में बदलाव किया जा रहा है और कोशिश हो रही है शहर के विकास से जुड़ी योजना जनता के बीच लाई जाए। इसके लिए योजनाओं पर काम चल रहा है।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त।