सहारनपुर। लंबे समय से चली आ रही खनन पर रोक के कारण निर्माण में प्रयुक्त होने वाली रेत एवं बजरी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इस पर रोक तो हट गई है। लेकिन नई खनन पट्टा आवंटन की नीति और प्रकि्रया तय नहीं हुई है। इसके चलते 15 जून तक सड़कों को पक्का करने का काम अब संभव नहीं लग रहा है।
इन हालात में अकेले सहारनपुर में सड़क, नालों, नालियों और इंटरलाकिंग सड़कों से जुड़े करीब एक हजार कार्यों पर पिछले चार महीने से ब्रेक लगा है। यूपी में खनन बंद होने की वजह से विभाग पड़ोसी राज्यों से खनन सामग्री लाने के प्रयास कर रहे हैं, मगर उपलब्ध हो रही सामग्री पर्याप्त नहीं है। विभागीय अफसर टेंशन में हैं। संबंधित विभागों ने शासन को चिट्ठी लिखकर 15 जून तक सड़कों को गड्ढामुक्त कराने में असमर्थता जता दी है। शहर की तमाम सड़कों, नालों, नालियों और गलियों के निर्माण का जिम्मा नगर निगम का है। मगर पिछले चार महीने से खनन सामग्री न मिलने की वजह से निगम का निर्माण विभाग हाथ पर हाथ धरकर बैठने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा है।
मुख्य अभियंता पीके मित्तल ने बताया कि खनन सामग्री न मिलने की वजह से उनके करीब ढाई सौ कार्य लटके हुए हैं। हरियाणा और उत्तराखंड से अब रेत और बजरी मिलना शुरू हुआ है मगर उसके दाम दोगुने हैं। ऐसे में कार्यों के लिए निर्धारित बजट कम पड़ रहा है। इस स्थिति में वह समझ नहीं पा रहे हैं कि कार्य काराएं या नहीं। यही वजह है कि नगर में अनेक नाले, नालियां, सड़कें और गलियों का निर्माण कार्य रुका हुआ है।
जिले के विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी जिला पंचायत की भी है। मगर इन दिनों जिला पंचायत भी बेबस है। इसकी प्रमुुख वजह खनन सामग्री न मिल पाना है। वर्तमान में सीसी की करीब 70 से 80 सड़कों का निर्माण कार्य रुका हुआ है। विभाग के जेई आलोक चंद गौड़ ने बताया कि जो कार्य रुके हैं। यदि सामग्री मिल गई होती तो पूरे हो गए होते। गांव साधारणसिर, तल्हेड़ी बुजुर्ग, फतेहपुर, सांपला, डकरावर कलां, अहमदपुर, महेशपुरी कला आदि से जुड़े कार्य लंबित पड़े हैं। बताया कि अब हरियाणा और उत्तराखंड से खनन सामग्री मिलना शुरू हुई है। मगर उसके दाम दो दोगुने हैं।
दोगुने दाम में सामग्री खरीदकर सड़कों का निर्माण निर्धारित बजट में करा पाना संभव नहीं है। रेत और बजरी न मिल पाने की वजह से डूडा को इंटरलॉकिंग सड़कों के लिए टाइल्स नहीं मिल रही हैं। इसकी वजह से डूडा प्रस्तावित एक दर्जन से अधिक इंटरलॉकिंग सड़कों का निर्माण चालू नहीं करा पा रहा है। पड़ोसी राज्यों में टाइल्स उपलब्ध हैं, मगर उनके दाम दोगुने से अधिक हैं, जिन्हें खरीद पाना संभव नहीं है। इसके चलते दिक्कतें हैं।