सहारनपुर। कार्रवाई के बावजूद जिले में अभी भी दर्जनों मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं। न तो मदरसा संचालक पंजीकरण कराने के प्रति गंभीर नजर आ रहे हैं और न ही मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा दिलाए जाने का प्रयास कर रहे हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई छापामार कार्रवाई में इसका खुलासा हो चुका है। विभागीय अधिकारी सिर्फ सूची बनाने तक की खानापूर्ति करके इतिश्री कर दी है।
शासन ने सभी मदरसों का पंजीकरण कराए जाने एवं उनमें पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कार्रवाई के निर्देश अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को दिए थे। शासन ने ऐसे मदरसों की भी सूची तैयार कराई थी जो सिर्फ कागजों में ही संचालित हो रहे थे और अब तक सरकारी इमदाद लेकर डकार रहे थे। ऐसे कुछ मदरसों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते मदरसों की फाइल को विभाग के अधिकारियों ने दबा दिया।
जिले में 754 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। इनमें से अधिकांश ने पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा लिया है। मंगलवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र कुमार सिंह ने गांव महमूद मजरा रायपुर में बिना मान्यता के मदरसा संचालित होते हुए पकड़ा था। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के पहुंचने से पहले ही बच्चों की छुट्टी कर दी गई थी। संचालक मान्यता दस्तावेज नहीं दिखा पाए थे। यह तो उदाहरण मात्र है। इसी तरह जनपद में बिना मान्यता के बड़े पैमाने पर मदरसे संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे मदरसों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की है। लेकिन विभाग के अधिकारियों ने मदरसों का पंजीकरण कराने में भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके चलते मदरसों को मान्यता भी नहीं मिल पाई। जिले में अभी भी कई दर्जन मदरसे बिना मान्यता के चल रहे हैं और उनमें पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं सरकारी इमदाद तथा आधुनिक शिक्षा से वंचित हैं।
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बिना मान्यता के कोई मदरसा नहीं चलने दिया जाएगा, जो लोग बिना मान्यता के मदरसे संचालित कर रहे हैं, उनको चिंहित करने के निर्देश जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को दे दिए गए हैं।
---संजीव रंजन, मुख्य विकास अधिकारी