सहारनपुर। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भी सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं में कोई परिवर्तन नहीं आया है। जानकर हैरानी होगी कि जनपद की कुल 38 लाख आबादी के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों के पास मात्र 98 ही चिकित्सक हैं। इतना ही नहीं, देहात यानी जहां पर्याप्त मात्रा में प्राइवेट अस्पताल नहीं हैं और लोगों के पास इलाज के लिए पैसा नहीं है। वहां अनेक सीएचसी और पीएचसी फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल की ही बात करें तो यहां चिकित्सकों के 61 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से मात्र 28 ही चिकित्सक तैनात हैं, जबकि 35 पद खाली चल रहे हैं। चिकित्सकों की इस भारी कमी की वजह से मौजूदा चिकित्सकों पर काम का भार रहता है। दिन में ओपीडी पर रहने के बाद उनको इमरजेंसी आदि में लगा दिया जाता है। कुछ चिकित्सक ऐसे हैं जिन्हें मजबूरन निर्धारित घंटे से अधिक ड्यूटी करनी पड़ रही है। ट्रामा सेंटर है, मगर वहां भी पर्याप्त चिकित्सक और सुविधाएं न होने की वजह से गंभीर घायलों को चिकित्सक इमरजेंसी के बाहर से ही रेफर कर देते हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि बेहोशी वाले चिकित्सक के सात पद स्वीकृत हैं, जिनमें से मात्र एक चिकित्सक है। यदि उक्त चिकित्सक किसी कारणवश ड्यूटी पर न हो तो गंभीर से गंभीर मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो पाता है। ऐसे में या तो मरीज को निजी अस्पताल लेकर जाना पड़ता है या फिर वह दम तोड़ देता है। वर्तमान में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी लैब और आईसीसीयू की सुविधा है। एमआरआई और सिटी स्कैन की सुविधा जल्द मिलने की बात कही जा रही है।
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पदनाम स्वीकृत पद कार्यरत पद रिक्त पद
चेस्ट फिजीशियन 02 01 01
बाल रोग विशेषज्ञ 03 02 01
रेडियोलॉजिस्ट 03 01 02
पैथोलॉजिस्ट 03 01 02
एनेस्थेटिस्ट 05 01 04
ईएमओ 13 05 08
आर्थोपैडिक सर्जन 05 03 02
सर्जरी 07 02 05
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इन बीमारियों के इलाज का कोई चिकित्सक नहीं
जिला अस्पताल में दंत रोग विशेषज्ञ, प्लास्टिक सर्जन, कॉर्डियोलॉजिस्ट, मनोरोग विशेषज्ञ, यूरो सर्जन, न्यूरो सर्जन, न्यूरो फिजीशियन, नैफ्रोलॉजिस्ट और स्टोर प्रभारी के पद पूरी तरह खाली हैं। ऐसे में इन गंभीर बीमारियों के मरीजों को महंगे खर्चे पर निजी चिकित्सालयों में ही इलाज कराना पड़ता है।
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फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही कई सीएचसी और पीएचसी
सहारनपुर। देहात क्षेत्र के कई सीएचसी और पीएचसी फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहे हैं। सीएचसी और पीएचसी पर केवल 70 चिकित्सक तैनात हैं, जबकि डेढ़ सौ से अधिक पद खाली पड़े हैं। अधिकारियों का दावा है कि वह डिमांड बनाकर भेजते हैं, मगर शासन से कोई कदम नहीं उठाया जाता है।
जिले की सर्वाधिक संवेदनशील सीएचसी गंगोह में चिकित्सकों के 15 पद स्वीकृत हैं। मगर यहां चिकित्सा प्रभारी सहित कुल तीन ही चिकित्सक तैनात हैं। जो 12 पद रिक्त पड़े हैं उनमें महिला एवं प्रसूता रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ जैसा महत्वपूर्ण पद भी खाली है। यही वजह है गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इलाज के लिए या तो जिला अस्पताल ले जाया जाता है या फिर निजी चिकित्सकों के पास। बड़गांव स्थित पीएचसी पिछले करीब एक साल से फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही है। अंबेहटा चांद में पीएचसी बनाई जा रही है। यहां केवल एक चिकित्सक तैनात है। अंबेहटा में पीएचसी को सीएचसी बना दिया गया है, मगर कई साल ये यह भी फार्मासिस्ट के ही भरोसे चल रही है। चिलकाना सीएचसी में चिकित्सकों के सात पद स्वीकृत हैं, जिनमें से चार खाली पड़े हैं। गागलहेड़ी के सुन्हेटी खरखड़ी में सीएचसी चिकित्सकों के दो पद खाली हैं। सीएचसी नानौता चिकित्सकों के आठ पद स्वीकृत हैं, जिनमें से चार तैनात हैं, जबकि चार खाली। सीएचसी नकुड़ में चिकित्सकों के छह पद स्वीकृत हैं, जिनमें से एक नियमित और दो संविदा के चिकित्सक रखे गए हैं। तीन पद खाली हैं। डिलीवरी के लिए एमबीबीएस की जगह बीएमएस चिकित्सक संविदा पर रखा गया है। रामपुर मनिहारान सीएचसी और महांसू पीएचसी पर चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। गागलहेड़ी के हरोड़ा स्थित सीएचसी पर सात पद स्वीकृत हैं, जिनमें से एक पद खाली है। सीएचसी बेहट में चिकित्सकों के अनेक पद खाली पड़े हैं। सरसावा सीएचसी में चिकित्सकों के छह पदों के सापेक्ष दो चिकित्सक तैनात हैं, जबकि चार पद खाली हैं।
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केवल सहारनपुर ही नहीं प्रदेश भर में चिकित्सकों की भारी कमी है। हमने 140 चिकित्सकों की डिमांड बनाकर शासन को भेजी हुई है। कोशिश यही रहती है कि मौजूदा चिकित्सकों से अधिक से अधिक काम लेकर जनता को लाभ पहुंचाया जाए।
डॉ. बीएस सोढी, सीएमओ।