फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अयोध्या नगरी में कभी नहीं हुआ युद्ध : प्रियदास

विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या नगरी में कभी नहीं हुआ युद्ध : प्रियदास
विज्ञापन

देवबंद (सहारनपुर)। वृंदावन के संत प्रियदास जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम को अपने जीवन में कभी अहंकार नहीं हुआ कि अमुक कार्य मैने किया है। तुलसीदास ने रामचरित्रमानस में कहा कि वक्ता का मन निर्मल होना चाहिए।
विज्ञापन

श्री गीता भवन में रामकथा के सातवें दिन संत प्रियदास जी महाराज ने कहा कि इस संसार से जाने के बाद जीव की प्रशंसा होने पर उसका जीवन सार्थक होता है। रामचरित्रमानस का द्वितीय कांड अयोध्या कांड है। अयोध्या ऐसी नगरी का नाम है जहां कभी युद्ध नहीं हुआ। अयोध्या कांड में प्रभु श्रीराम को यौवनावस्था में दर्शाया है। जीवन में एकांत का सेवन ही प्रभु चिंतन होता है। तुलसीदास ने रामचरित्रमानस में दर्शाया कि मानव को दूसरों के प्रति सदैव अच्छा सोचना व बोलना जीवन की अच्छाई होती है। संत ने कहा कि वह मनुष्य बड़े भाग्यशाली होते हैं, जो श्रीरामकथा का अपने जीवन में श्रवण कर पाते हैं। साध्वी चित्रा शुक्ला ने कहा कि धर्म से बड़ा कोई सत्य नहीं है। परंतु उपकार सबसे बड़ा पुण्य है। किसी भी प्राणी के मन को कभी दुखाना नहीं चाहिए। परमात्मा को पाने के लिए अनेक क्रियाएं करनी पड़ती है। अहंकार ही मनुष्य के पतन का कारण होता है। प्रभु की इच्छा ही सर्वोपरि होती है। प्रभु ही तीनों लोकों के स्वामी हैं। सातवें दिन कथा के यजमान नरेंद्र बंसल रहे। प्रसाद वितरण अरुण गोयल ने किया। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें