जैन धर्म का पर्युषण पर्व शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर/सरसावा। जैन धर्मावलंबियों के पवित्र पर्युषण पर्व शुरू होने पर मंदिरों में काफी रौनक रही। मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की गई और पूजा-पाठ कराई गई।
शनिवार से शुरू दस दिनो तक मंदिरो में विशेष पूजा पाठ का आयोजन किया जायेगा। सबसे पहले दिन उत्तम धर्म की पूजा की गयी। इस मौके पर विद्वान सतीश चंद जैन उत्तम धर्म की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि धर्म केवल मंदिरों में बैठकर तथा शास्त्र पढ़कर नहीं होता है। धर्म का भाव रखना पड़ता है साथ ही शास्त्रों में दी गई धर्म की परिभाषा को धारण करना पड़ता है। निर्धन तथा जरूरतमंद की सेवा भी धर्म का ही रूप है।
मंदिर में बैठकर धर्म करने से शास्त्रों को कंठस्थ तो किया जा सकता है तथा मानव लोक में प्रसिद्ध पाई जा सकती है। लेकिन धर्म का मर्म कुछ ओर ही है। प्राणी मात्र की सेवा तथा दया धर्म का भाव रखना धर्म की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि अनेक लोग मंत्रों को तो कंठस्थ कर लेते हैं। लेकिन उनके अर्थ से अनजान रहते हैं। ऐसे धर्म का कोई मोल नही है। दसलक्षण पर्व के मौके पर कई धार्मिक प्रतियोगिताएं कराई गईं। साथ ही मंदिरों को रंगबिरंगी झालरों तथा रंगीन रोशनी से सजाया गया।