सहारनपुर। जिले को दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले आम की फसल पर इन दिनों ततिया कीट का साया है। मंडल के दूसरे जनपद मुजफ्फरनगर में भी यह कीट बागवानों को नुकसान पहुंचा रहा है। मगर यदि बागवान थोड़ा मेहनत करें तो आम की फसल को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है। यह जानकारी औद्योगिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के संयुक्त निदेशक राजेश कुमार द्वारा ली जा रही बैठक में हुआ।
उन्होंने बैठक में मौजूद अधिकारियों को बताया कि ततिया कीट का असल नाम शूटगाल सायला है, मगर सहारनपुर में इसे ततिया कीट ही कहते हैं। उन्होंने बताया कि कीट की मादा मार्च और अप्रैल महीने में आम के पेड़ के पत्तों पर अंडे देती है। जुलाई के अंतिम सप्ताह में अंडों से निम्फ यानी बच्चे निकलते हैं और आम की नई कलिकाओं से रस चूसते हैं। इसके साथ ही यह कीट एक प्रकार का श्राव उत्सर्जित करते हैं, जिसकी वजह से आम की कलिका गुलाब की कली की तरह नोकदार कलिका के रूप में परिवर्तित हो जाती है और शाखा की वानस्पतिक वृद्घि रुक जाती है। इसकी वजह से आम के पेड़ पर बोर नहीं आ पाता है। इसकी वजह से बागवानों को नुकसान पहुंच रहा है। मगर कीट की रोकथाम के लिए मोनोक्रोटोफास का पहला छिड़काव 27 जुलाई से चार अगस्त के बीच करा देना चाहिए। पहले छिड़काव के 15 दिन बाद क्यूनलफास का छिड़काव कराएं। दूसरे छिड़काव के 15 दिन बाद डायमेथोएट का छिड़काव करें। इससे कीट का प्रकोप खत्म हो जाता है।