ब्रह्म साक्षात्कार और कुंडली जागरण का पर्व है होली
शाकंभरी (सहारनपुर)। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में स्थित शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी एवं अखिल भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिद्ध भैरव तंत्राचार्य महंत सहजानंद ब्रह्मचारी ने होली पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि होली का उत्सव धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से बहुत महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि तंत्र के आदि गुरू भगवान शिव माने जाते हैं। देवों के देव महादेव तंत्र शक्ति का आधार यही है। व्यक्ति को ब्रह्मा से साक्षात्कार हो जाए और उसकी कुंडली जागरण हो तथा तृतीय नेत्र एवं सहस्रार जागृति हो। उन्होंने बताया कि भगवान शिव ने प्रथम बार अपना तीसरा नेत्र फाल्गुन पूर्णिमा होली के दिन खोला था और कामदेव को भस्म किया था। इसलिए यह दिवस तृतीय नेत्र जागरण दिवस है। होली का पर्व पूर्णिमा के दिन आता है। इस पर्व को भगवान की भक्ति करके मनाना चाहिए। होली के दिन घर में अपशब्द का प्रयोग न करें। ऐसा करने से घर की शांति भंग हो जाएगी और दरिद्रता का आगमन हो जाएगा। सब के साथ अच्छा बर्ताव करें। इस दिन भूलकर भी किसी को अपशब्द ना बोले। पूर्णिमा को घर में सत्यनारायण भगवान की कथा स्वयं पढ़कर परिवार के सभी सदस्यों को सुनाएं। सुबह जल्दी उठे और स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाएं। इस दौरान ॐ आदित्ययाय नम: का जाप करें और पीले फल जैसे केला और आम आदि दान करें। कच्चा दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से पंचामृत बनाकर शिवलिंग पर ओम नम: शिवाय का मंत्र करते हुए जल चढ़ाए। गरीबों को नए कपड़े और अनाज दान करें। हनुमान मंदिर जाकर हनुमान जी के दर्शन कर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
होली का मुहूर्त
पूर्णिमा शुरू 20 मार्च सुबह 10:44 बजे से भद्रा सुबह 11:00 बजे से रात 8:50 तक रात्रि 8:58 से होलिका दहन शुभ रहेगा। प्रदोष व्यापिनी फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में होलिका दहन करें। इसमें भद्रा वर्जित है। इस वर्ष संवत 2076 में फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा 20 मार्च बुधवार को 10 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन 21 मार्च बृहस्पतिवार को सुबह सात बजकर 12 मिनट तक तक विद्यमान रहेगी। प्रदोष व्यापनि निशामुखी पूर्णिमा 20 मार्च बुधवार को होलिका दहन 20 मार्च को ही शुभ रहेगा। 21 मार्च बृहस्पतिवार को सुबह सात बजकर 12 मिनट उदयकाल में पूर्णिमा होने के कारण चैतन्य महाप्रभु, दारुणरात्रि, हुताशनी होलाष्टक समाप्त, धुलैंडी होली महोत्सव परंपरानुसार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाना शुभ है।