देवबंद (सहारनपुर)। अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की मांग को लेकर संतों के आमरण अनशन पर बैठने के मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट विचाराधीन है तो फिर इस तरह के आमरण अनशन की क्या जरुरत है। इस प्रकार का कार्य करने से मुल्क का माहौल खराब होने की आशंका बढ़ जाती है।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि बाबरी मस्जिद का मामला अदालत में विचाराधीन है। अदालत इस पर जो भी फैसला देगी वो सभी मुसलमानों को स्वीकार होगा। इससे पहले ऐसा कोई कदम उठाना जिससे मुल्क का माहौल खराब हो या नफरत फैले यह मुल्क के दस्तूर और अमन चैन के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हर शख्स की यह कोशिश होनी चाहिए कि मुल्क में प्यार और मोहब्बत बढ़े और आपसी सौहार्द कायम रहे। साथ ही कहा कि लोकतांत्रिक देश में हर व्यक्ति को आवाज बुलंद करने का पूरा अधिकार है। लेकिन ऐसा कोई भी कृत्य जिससे मुल्क की शांति व्यवस्था भंग होने का खतरा हो उससे परहेज करना चाहिए।
वसीम रिजवी रावण, हिंदू धर्म अपना लें : उलमा
देवबंद। ओवैसी जैसे बगैर मूंछों वाले रावण राम मंदिर निर्माण में बाधा हैं। शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के बयान पर देवबंदी उलमा ने रोष जताते हुए कहा कि रिजवी खुद इस्लाम से खारिज हैं। आरएसएस जो उनको लिखकर देती है वो उसी को पढ़ते हैं। इसके साथ ही उलमा ने रिजवी को रावण बताते हुए उन्हें हिंदू धर्म अपनाने की सलाह दी है।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि वसीम रिजवी के जितने बयान आते हैं वो बेतुके होते हैं जिन पर कोई खास ध्यान नहीं देता है। उनके धर्मगुरुओं ने ईरान से फतवा जारी कर रिजवी को इस्लाम से खारिज कर दिया था। हिंदुस्तान में उनके धर्मगुरु मौलाना जव्वाद ने भी इस की पुष्टि की हुई है। उन्होंने कहा कि चुनाव का वक्त नजदीक आने पर वसीम रिजवी और उन जैसे लोगों को आरएसएस मोहरा बनाकर इस्तेमाल करती है। मुफ्ती असद ने रिजवी को रावण बताते हुए कहा कि वह कहते हैं कि उनके सपने में राम जी आए हैं और वह जल्द राम मंदिर बनाने की बात कर रहे हैं। इसलिए रिजवी को चाहिए कि वो हिंदू धर्म अपना लें।