बाबा जाहरवीर के जयकारों से गूंजा म्हाड़ी स्थल
सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक म्हाड़ी मेेले में दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने निशाने चढ़ाकर मन्नतें मांगी। म्हाड़ी स्थल बाबा श्री जाहरवीर के जयकारों से गूंज रहा है। श्रद्धालु और निशानिए ढोल नगाड़ों की थाप पर नृत्य करते हुए पहुंचे। 26 छड़ियों की म्हाड़ियों पर भंडारे आयोजित चल रहे हैं। सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की कतारें जारी रहीं।
बुधवार रात 11 बजे तक नेजे सहित 26 छड़ियां बैंडबाजों संग म्हाड़ी पर पहुंच गईं। बड़ी संख्या में अंबाला रोड स्थित काल भैरव विश्रामपुरी भैरव मंदिर से गंगोह रोड और म्हाड़ी तक श्रद्घालुओं का रैला चलता रहा। रात भर श्रद्धालु म्हाड़ी पर पहुंचते रहे। रात में म्हाड़ी पर छड़ियों के भक्तों ने बाबा श्री जाहरवीर की वीरता के किस्से श्रद्धालुओं को सुनाए। सरदार सहित सभी 26 छड़ियों की म्हाड़ियों को रंग-बिरंगी लाइटों जगमगा रही थी। इनका आकर्षण देखते ही बन रहा था। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु और छड़ियों के निशानिए बाबा जाहरवीर का जयघोष करते हुए नाचते-गाते रहे।
बृहस्पतिवार को मेले के दूसरे दिन भी म्हाड़ी पर श्रद्घालुओं का सैलाब दिखाई दिया। पुलिस-प्रशासन के मुताबिक उत्तराखड़, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान तथा पड़ोसी जनपदों से करीब एक लाख श्रद्घालुओं म्हाड़ी पर पहुंचकर निशान चढ़ाए। म्हाड़ी पर दूसरे दिन भी भंडारों के आयोजन हो रहे। शाम और रात के समय श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ हो गई। पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए रखे। गंगोह मार्ग और म्हाड़ी पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात रही।
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नगर निगम की सफाई व्यवस्था फेल
सहारनपुर। म्हाड़ी मेले का आयोजन नगर निगम द्वारा कराया जाता है, लेकिन म्हाड़ी पर सफाई व्यवस्था का कोई खास ध्यान नहीं रखा गया है। बृहस्पतिवार को म्हाड़ी स्थल पर कई जगह गंदगी देखने को मिली। रात में बड़ी नहर पुल से लेकर आगे तक प्रकाश व्यवस्था भी समुचित नहीं थी। इसके चलते असामाजिक तत्वों और जेबकतरों के झुंड सक्रिय रहे। भंडारों के बाद फेंके गए पत्तलों को साफ नहीं कराया गया। इसके अलावा कई जगहों पर बिखरे पड़े प्रसाद को भी नहीं हटवाया गया।
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आज लौटेंगी छड़ियां
सहारनपुर। म्हाड़ी मेले के तीसरे दिन शुक्रवार को नेजे संग 26 छड़ियां वापस लौटेंगी। म्हाड़ी पर सुबह आठ बजे पूजन के बाद छड़ियां काल भैरव विश्रामपुरी भैरव मंदिर के लिए चलेंगी। नेजे के पीछे सरदार और अन्य छड़ियां चलेंगी। दोपहर 12 बजे तक सभी छड़ियां मंदिर पर पहुंच जाएंगी, जो शाम पांच बजे तक मंदिर के बाहर मेला गुघाल परिसर में खड़ी रहेंगी। यहां भी भारी संख्या में श्रद्घालु प्रसाद चढ़ाएंगे। शाम के समय छड़ियां अपने-अपने स्थानों के लिए चल पड़ेंगी। इसके साथ ही महानगर में एक बार फिर लौटती छड़ियों के बसेरों के आयोजन शुरू हो जाएगा। तीन दिन तक लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर छड़ियों के पूजन के साथ भंडारे का आयोजन करेंगे।