सहारनपुर। आज सहारनपुर को पहला मेयर मिलने जा रहा है। पहली बार के मेयर का ताज कांटों से कम नहीं होगा। शहर की खराब हालत और घोटालों के नगर निगम के साथ निगम के कर्मचारियों की राजनीति से जूझना बड़ी चुनौती रहेगी।
नगर पालिका से नगर निगम बनने के बाद नौ साल बाद अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ है। सहारनपुर में मेयर बनने जा रहा है। शुक्रवार को सहारनपुर को पहला मेयर मिल जाएगा। लेकिन नगर निगम की हालत को देखते हुए मेयर का रास्ता इतना आसान नहीं होगा।
नौ साल के लंबे अंतराल तक नगर निगम को सिर्फ अधिकारी ही अपनी मनमर्जी से चलाते रहे। अधिकारी आते रहे और जाते रहे, किसी ने भी शहर के विकास के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया। विकास की कोई योजना नहीं, सौंदर्यीकरण का कोई कार्य नहीं। जिसकी सरकार आई, उसके अधिकारियों की तैनाती हुई और अपनी मानमानी करके चले गए। सर्वोच्च पदों पर कोई स्थानीय व्यक्ति नहीं रहा तो शहर के विकास के लिए किसी ने गौर नहीं किया। जिससे शहर की हालत खराब होती चली गई। सड़कों की खराब हालत, शहर का जाम और फैली गंदगी ने लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं। नगर निगम की जमीनों पर कब्जे होते चले गए। एक के बाद एक घोटाले होते चले गए। कर्मचारियों की लापरवाही और घपले का आलम यह हो गया कि पाकिस्तान की मंत्री हिना रब्बानी एवं पाकिस्तान के एक अन्य व्यक्ति के नाम से संपत्ति दर्ज कर ली गई। संपत्ति के नाम चढ़ाने में जमकर हेरफेर किया गया। गृह कर और जल कर में गड़बड़ी सामने आई। छोटे-छोटे मामलों को लेकर अवैध धन की मांग की जाने लगी। जिसके आरोप में एक महिला अधिकारी को गिरफ्तार भी किया गया था। कर्मचारियों ने निगम में राजनीति शुरू कर दी और निगम की कार्य व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई। ऐसे में शहर की खराब स्थिति और घोटालों से अटे नगर निगम को पटरी पर लाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।