उत्खनन में मिले भट्टी के अवशेष
रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। गांव सकतपुर के पुरातत्व विभाग द्वारा किए जा रहे उत्खनन की जांच के लिए आगरा से पहुंचे आगरा उपमंडल के पुरातत्व विभाग के संयुक्त निदेशक एसपी औता ने अब तक किए गए उत्खनन कार्य का बारीकी से निरीक्षण किया।
बता दें कि 24 फरवरी से सकतपुर में पुरातत्व विभाग की उत्खनन का कार्य कर रही है। अब तक की खुदाई में कई महत्वपूर्ण अवशेष बरामद किए जा चुके हैं। इनमें विशालकाय जानवर का दांत युक्त जबड़ा, पत्थर का घोड़ा, मृदभांड, तांबे की कुल्हाडी, मिट्टी के बर्तनों के अवशेष, खिलौने वाली गाडी के पहिए, सिल बट्टा, हस्तकुठार, दाल के बीज आदि प्राप्त हुए हैं। अब एक बड़ी सफलता यह मिली है कि उत्खनन के दौरान एक भट्टी की आकृति दिखाई दे रही है। इस पर सावधानी से खुदाई की जा रही है। पुरातत्वविद् डा. भुवन विक्रम सिंह ने बताया कि खुदाई में एक भट्टी की आकृति सामने आई है। इस पर शोध किया जाएगा कि चार हजार वर्ष पूर्व की सभ्यता में मानव भट्टी का किस-किस कार्य में उपयोग किया करते थे।
उन्होंने कहा कि उत्खनन के दौरान भट्टी का मिलना यह भी साबित करता है कि इस स्थान पर आबादी निवास करती थी। वह किस प्रकार से अपना जीवन जीते थे। इसका भी शोध के बाद पता चलेगा। वर्तमान के 16 ट्रेंचो पर खुदाई का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के लिए आए संयुक्त निदेश एसपी औता अपनी जांच रिपोर्ट देंगे। इसके बाद ही आगे उत्खनन का कार्य बढ़ाया जाएगा। डा. भुवन विक्रम ने बताया कि अब तक मिले अवशेष चार हजार वर्ष की सभ्यता के पाए गए हैं।
अब भट्टी के शोध के बाद ही इस सभ्यता के रहस्य से पर्दा उठ पाएगा कि उस समय मानव का किस प्रकार का रहन-सहन था। उनके पास किस प्रकार की कला थी। वह खाने के लिए किस वस्तु का उपयोग करते थे। मांसाहारी थे या शाकाहारी थे। इसका पता चल रहे उत्खनन के दौरान कोई प्रमाण मिलने पर ही हो सकता है।