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बेटी को अधिकार दो, बेटे जैसा प्यार दो

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सहारनपुर। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा अनूठी मुहिम अपराजिता 100 मिलियंस स्माइल्स के तहत आयोजित मैराथन वॉक में नारी शक्ति उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। बेटी को अधिकार दो, बेटे जैसा प्यार दो, बेटी ही बचाएगी और बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ के नारे के साथ बालिकाएं, शिक्षिकाएं, योग प्रशिक्षक और अन्य महिलाएं मैराथन वॉक में चलीं तो शहर थम गया। बृहस्पतिवार सुबह साढ़े सात बजे से ही विभिन्न स्कूलों की बालिकाएं दीवानी कचहरी तिराहे पर एकत्रित होने लगी थीं। मैराथन वॉक का शुभारंभ सुबह आठ बजे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार ने हरी झंडी दिखाकर किया। यहां से कलक्ट्रेट तिराहा, दिल्ली रोड, हसनपुर चुंगी होते हुए मैराथन वॉक दिल्ली रोड पर आशा मॉडर्न स्कूल की नई ब्रांच में पहुंची। मैराथन वॉक के दौरान पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर प्रथम इंदु सिद्धार्थ और पुलिस क्षेत्राधिकारी द्वितीय मुकेश कुमार मिश्र तथा सदर कोतवाली प्रभारी अशोक सोलंकी की देखरेख में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।
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समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मंडलायुक्त सीपी त्रिपाठी, जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय, आशा मॉर्डन स्कूल के प्रधानाचार्य दिव्य जैन, डाक्टर स्वाति जैन, डाक्टर सौम्य जैन अलावा पतंजलि योग समिति के सदस्य मनोरमा शर्मा समेत अनेक लोग शामिल हुए। आयोजन में आशा माडर्न स्कूल, एथेनिया स्कूल, सोफिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, केएलजी स्कूल, बाल गृह बालिका विद्यालय, पीच ग्रोव स्कूल, नेशनल पब्लिक स्कूल सहित अन्य स्कूलों ने भी प्रतिभाग किया।
आत्मनिर्भर बनकर देश का भविष्य संवारें बालिकाएं - एसएसपी
मैराथन वॉक का शुभारंभ कर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार ने कहा कि बालिकाएं कमजोर नहीं है। खासकर खेल क्षेत्र में बेटियों ने देश का मान बढ़ाया। महिलाएं क्षमता में किसी भी प्रकार पुरुषों से कम नहीं हैं। नौकरीपेशा महिलाएं दफ्तर भी जाती हैं और घर की जिम्मेदारी भी संभालती हैं, जबकि घर लौटने पर पुरुष कहते हैं कि मैं थक गया। बालिकाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें उ चित मार्गदर्शन तथा उचित प्लेटफार्म की जरूरत होती है। बालिकाओं को साक्षी और हिमादास की तरह मेहनत करनी चाहिए और अपना तथा अपने परिवार और देश का नाम रोशन करना चाहिए। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना होगा। जब तक आर्थिक रूप से खुद मजबूत नहीं होगी, वास्तविक आजादी नहीं मिल सकती। अमर उजाला का यह अभियान बेहद सराहनीय है।
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बेटियां याद रखें, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती - मंडलायुक्त
बेटियों ने जो तेज कदम चाल की, उसमें उनकी ऊर्जा और जोश नजर आया है। सहारनपुर की बेटियों की यह गूंज बहुत दूर तक जाएगी। उन्होंने कहा कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। बेटियां आगे बढ़ें और कोशिश करेें। बेटियों की ऊर्जा इतनी अपार होती है कि बेटे तो सिर्फ एक घर का ध्यान रखते हैं, बेटियां दो-दो परिवारों का ध्यान रखती हैं। उन्होंने सहारनपुर की प्रशासनिक अधिकारी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि बेटियां आगे बढ़ें और जिस मुकाम तक जाना चाहतीं हैं, उसके लिए प्रयास शुरू कर दें। बेटियों के लिए कोई भी लक्ष्य अब कठिन नहीं है। उन्होंने सहारनपुर की बेटियां जिंदाबाद का नारा भी लगवाया।
बेटियां अपराजिता हैं, अपराजिता शक्ति पुंज हैं - डीएम
बालिकाएं अपराजिता बनें। अपराजिता नीले रंग का एक फूल भी है, जिसे शक्ति की देवी मां दुर्गा के विशेष पूजन में अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि रावण को हराने के लिए भगवान श्रीराम ने भी अपराजिता स्रोत की साधना की थी। वहीं, ज्ञान, धन और शक्ति का स्रोत देवी ही हैं। बालिकाएं हमारे समाज में देवी स्वरूपा हैं। इसलिए बालिकाएं खुद पहचानें। प्रतिभा को निखारने के लिए खूब मेहनत करें, ताकि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनका और परिजनों का नाम रोशन हो सके।
बालिकाओं को उरी फिल्म दिखाने की घोषणा
जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने पुरस्कार वितरण के साथ ही मैराथन वॉक में शामिल बालिकाओं को सर्जिकल स्ट्राइक पर बनी फिल्म उरी दिखाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन अपराजिताओं को उन अपराजित सैनिकों की वीरता की कहानी देखनी चाहिए। उन वीर सैनिकों को भी वायुसेना की एक महिला कैप्टन ने ही बचाया था।
बालिकाओं ने दिखाया जोश तो ठहर गया शहर
कचहरी तिराहे से जैसे ही बालिकाओं के कदम आगे बढ़े तो पूरा शहर ही ठहर सा गया। बालिकाओं को इतनी संख्या में मैराथन वॉक करते देख रास्ते पर चलने वाले लोग अपने वाहनों रोक कर देखते रह गए। बालिकाओं के कदम इतने तेज पड़े कि उनके साथ चल रहे पुलिसकर्मियों को दौड़ तक लगानी पड़ गई। हर तिराहा, चौराहा जहां के तहां थम गया। एक किलोमीटर लंबी मैराथन के चलते काफी देर तक यातायात को रोकना पड़ा। लोग सड़क किनारे खड़े बालिकाओं के जोश की तारीफ करते रहे। जिसने भी देखा बालिकाओं के उत्साह की सराहना की।
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