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हिंडन को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए भूख हड़ताल पर बैठे बाबा मंगल गिरि

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बड़गांव (सहारनपुर)। हिंडन नदी को प्रदूषण मुक्त कराने की मांग को लेकर एक बार फिर बाबा मंगल गिरि महेशपुर गांव के शिव मंदिर में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस बार बाबा मंगल गिरि प्रशासन से आर पार की लड़ाई के मूड में हैं। बाबा ने मांग पूरी नहीं होने पर धरनास्थल पर ही जिंदा समाधि तक लेने की चेतावनी दी है।
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बता दें कि हिंडन नदी के किनारे बसे कस्बा सहित क्षेत्र के गांव भगवानपुर, अंबेहटाचांद ,सांवतखेड़ी, कुतबामाजरा, टपरी, सहजी, चंदपुर, महेशपुर, शब्बीरपुर, शिमलाना, चिराऊ, बहेड़ा, सिसौनी, बहेड़ा, रत्नहेड़ी, पीपलो, नन्हेड़ा खुर्द सहित कई गांव है जहां अब प्रदूषित हो चुकी नदी अपना कहर बरपा रही है। नदी किनारे बसे गांव के लोग हैंडपंपों से आ रहा पीले रंग का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर और इस प्रदूषित पानी की वजह से करीब साढ़े तीन सौ से ज्यादा ग्रामीण कैंसर जैसी भयानक बीमारी के चलते अकाल मौत का ग्रास बन चुके हैं। कई ग्रामीण आज भी कैंसर, चर्म रोग, आदि जैसी गंभीर से जूझ रहे हैं। सबसे पहले अमर उजाला ने ही प्रदूषित हिंडन नदी का यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था, उसके बाद नदी को प्रदूषण मुक्त कराने की मुहिम को अब क्षेत्रीय ग्रामीण ही नहीं साधू संत भी आगे बढ़ा रहे है। नदी किनारे बसे ग्रामीणों का कहना है कि शाम के समय नदी में बहने वाले केमिकल युक्त बदबूदार पानी से तीखी दुर्गंध उठती है।
ग्रामीणों के इस दर्द पर मंगलवार की दोपहर बाद महेशपुर गांव के शिव मंदिर में बाबा मंगल गिरी आखिर हिंडन नदी सहित उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त कराने का बीड़ा उठाकर सांकेतिक भूख हड़ताल पर बैठ गये है। इससे पहले बाबा मंगल गिरि ने वर्ष 2013 में शिमलाना गांव में हिंडन नदी को प्रदूषण मुक्त कराने को संतों के साथ सात दिन तक अनशन किया था। उसके बाद वर्ष 2016 में फिर बाबा को भगवानपुर में आमरण अनशन करना पड़ा था।
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बाबा ने बताया कि भूख हड़ताल से शासन प्रशासन नहीं चेता तो वे संतों के साथ आमरण अनशन शुरू करेंगे। तब भी शासन प्रशासन की नींद नहीं टूटी तो वह जिंदा समाधि लेने से भी पीछे नही हटेंगे। उन्होंने ग्रामीणों से भी सहयोग करने की अपील की। मंगलवार को बाबा मंगलगिरी के साथ मंदिर के पुजारी संत ध्यान दास आदि मौजूद रहे।
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