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सद्भाव के साथ धीरे धीरे लौट रहा है आपसी विश्वास

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बड़गांव (सहारनपुर)। पांच मई 2017 को शब्बीरपुर में हुआ हिंसा का वो नजारा आज भी लोगों की आंखों में तैर रहा है, जिसकी वजह से सदियों पुराना विश्वास तार-तार हो गया था। एक साल बाद अब गांव का माहौल सामान्य तो है, मगर आपसी विश्वास पूरी तरह पटरी पर नहीं आ पाया है। पिछले वर्ष की पांच मई की घटना को याद कर आज भी शब्बीरपुर सिहर उठता है। गांव के लोग इस घटना को अपने माथे पर कलंक के साथ गांव में आपसी सद्भाव एवं भाईचारे के लिए इतिहास की काली तारीख मानते हैं। वैसे अग्निकांड व तोड़फोड़ की उस घटना को भूलकर गांव के लोग अब एक दूसरे के यहां काम करने लगे है। आपसी सद्भाव और विश्वास धीरे-धीरे लौट रहा है।
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यह था पूूरा घटनाक्रम
पांच मई 2017 को शिमलाना में आयोजित महाराणा प्रताप की जयंती कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे राजपूत समाज के युवकों के डीजे बजाते हुए जुलूस के रूप में शब्बीरपुर से होकर गुजरते समय दलित समाज के लोगों ने विरोध जताया। जिस पर विवाद हो गया और पथराव तथा फायरिंग होने लगी। जिससे राजपूत समाज के रसूलपुर देवबंद निवासी युवक सुमित की मौत हो गई थी। आरोप है कि आक्रोशित राजपूत समाज के लोगों ने दलितों के घरों में आग लगा दी। सूचना पर पहुंचे थानाध्यक्ष एमपी सिंह के साथ भी कुछ लोगों ने मारपीट कर उनकी सरकारी जीप में तोड़ फोड़ कर डाली थी और एक सिपाही की स्कूटी तक को आग के हवाले कर दिया था। आसपास के गांवों में भी आगजनी की घटनाएं हो गईं। इस घटना से पूरे जिले में जगह-जगह जातीय तनाव पैदा हो गया।
दोनों पक्षों के छह लोगों पर लगी रासुका
शब्बीरपुर कांड एवं सहारनपुर हिंसा के मामले में दलित एवं राजपूत समाज के छह लोगों पर रासुका लगाई गई। जिसमें राजपूत समाज के सुधीर, विलास उर्फ राजू एवं सोनू उर्फ सोम पर तथा दलित समाज के शब्बीरपुर के प्रधान शिवकुमार एवं सोनू पर रासुका लगाई गई। जबकि शब्बीरपुर कांड के चलते हुई सहारनपुर हिंसा के आरोपी चंद्रशेखर उर्फ रावण पर भी रासुका लगाई गई। शब्बीरपुर कांड में पुलिस ने दोनों ओर से छह मामले दर्ज किए। जिनमें दोनों पक्षों के 166 लोगों को नामजद किया गया था, जबकि 600 लोगों के खिलाफ अज्ञात में मामला दर्ज किया गया था। इसमें लगभग 100 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। जिनमें से जांच के बाद कुछ लोगों को छोड़ा गया था।
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शब्बीरपुर कांड में राजनीतिक रोटियां सेकी गईं
शब्बीरपुर में हुई जातीय हिंसा को लेकर राजनीतिक भी जमकर हुई। शब्बीरपुर में बसपा प्रमुख मायावती ने सभा कर डाली, कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष राज बब्बर भी शब्बीरपुर पहुंचे। यही नहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी गांव शब्बीरपुर जाने के लिए सहारनपुर पहुंच गए। जिन्हें सरसावा में यमुना के पुल पर ही रोका गया था। प्रशासन ने उन्हें इसकी इजाजत नही दी तो उन्होने इमरान मसूद के द्वारा दलितों को सरसावा बुलाकर मुलाकात कर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बाद फिर हुआ था बवाल
बड़गांव। पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा सुप्रीमो मायावती ने 23 मई को शब्बीरपुर गांव आकर घर घर जाकर पीड़ितों का हाल जाना था। सभा के बाद अपने घर लौट रहे दलित वर्ग के लोगों के साथ सहारनपुर मार्ग पर बड़गांव में एक बाग के पास तो अंबेहटा चांद के बाहर जंगल में मारपीट कर दी थी, जिसमें दलित वर्ग के आशीष निवासी सुआखेड़ी की मौत हो गई थी ओर कई लोग घायल हो गये थे। शब्बीरपुर गांव में अग्निकांड़ की सूचना के बाद नौ मई को भीम आर्मी ने रामनगर सहारनपुर में जाम लगाकर मारपीट व तोडफ़ोड़ कर ड़ाली। कई मोटर साईकिलों और कार को आग के हवाले कर दियात था।
गांव के लिए कलंक मानते हैं लोग
बडग़ांव। शब्बीरपुर के ग्रामीण पांच मई को गांव पर कलंक मानते है। दोनों ही पक्ष पांच मई की घटना की निंदा करते हुए आपसी भाईचारे में विश्वास रखते हैं।
दलित पक्ष के शिवराज बताते है कि कुछ उपद्रवियों ने गांव का माहौल बिगाड़ा था। यह तारीख गांव ही नहीं क्षेत्र के माथे पर एक कलंक है। इस कलंक को आपसी सौहार्द से ही मिटाया जा सकता है।
कार्यवाहक ग्राम प्रधान सुमित कुमार कहते हैं कि दोनों पक्षों का एक दूसरे के बगैर कभी कार्य चलने वाला है ही नही। दोनों पक्षों को समझदारी के साथ कार्य करते रहना होगा। उन्होंने ने भी घटना को एक कलंक बताया।
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