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इस्लाम में दिव्यागों को भी हज पर जाने का हक हासिल: उलमा

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देवबंद (सहारनपुर)। सरकार द्वारा दिव्यांगों के हज पर प्रतिबंध लगाने के मामले में देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार किया है। उलमा का कहना है कि दिव्यांगों का हज करना जायज है। इस्लाम में इसकी इजाजत दी गई है।
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दारुल उलूम अशरफिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती अथर कासमी ने कहा कि ये एक शरई मसला है और इस्लाम में दिव्यांग को भी हज करने की इजाजत है। अगर सरकार को यह लगता है कि दिव्यांग हज पर जाकर भीख मांगते हैं और उससे हमारे मुल्क की बेइज्जती होती है तो यह ध्यान रखने वाली बात है कि सऊदी अरब में भीख मांगना प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में भी बिना जरूरत के भीख मांगने को हराम करार दिया गया है। इसलिए सरकार को चाहिए कि वे ऐसे इंतजाम करे कि दिव्यांगों को भीख न मांगनी पड़े। मुफ्ती अथर ने कहा कि हज का मसला एक शरई मसला है इसमें तो सरकार दखल न दें। रहा भीख मांगने का मसला तो बगैर जरूरत के जो मोहताज न हो उसके लिए भीख मांगना जायज ही नहीं है। उन्होंने सरकार से दिव्यांगों के लिए उचित व्यवस्था किए जाने की मांग की है। ताकि उन्हें भीख मांगने पर मजबूर न होना पड़े।
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