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अवैध खनन की जांच के नाम पर महज खानापूर्ति

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अवैध खनन की जांच के नाम पर महज खानापूर्ति
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सहारनपुर। अफसरों के साथ मिलकर नदियों का सीना छलनी करने वाले खनन माफियाओं के खिलाफ प्रशासन अब तक प्रभावी कार्रवाई में नाकाम रहा है। अवैध खनन पर कोर्ट और सरकार की सख्ती के बावजूद जिला प्रशासन केवल नोटिस की कार्रवाई तक सीमित है। इतना ही नहीं, एक महीने पहले चिह्नित 437 अवैध खनन के मामलों में धीरे-धीरे कमी आने लगी है। जबकि पांच साल में कई ऐसे मामले प्रशासन की पकड़ में आए थे, जिनमें करोड़ों रुपए का जुर्माना होना था। मगर, अफसरों की शह के चलते अवैध खनन में लिप्त लोगों को चेतावनी देकर ही छोड़ दिया गया। सीबीआई टीम लौटने के बाद अवैध खनन के मामले में प्रशासन का लचर रवैया समझ से परे है।
सहारनपुर में अवैध खनन हमेशा चर्चाओं में रहा है और प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी इस पर लगाम नहीं लग पाई। हालांकि करीब एक साल पहले एनजीटी ने खनन पर पूरी तरह से रोक लगाई है, मगर यह कागजी कार्रवाई तक सीमित है। अवैध खनन पर न्यायालय के सीबीआई जांच के आदेश के बाद प्रशासन जरूर थोड़ी हरकत में आया। सीबीआई टीम आने से पहले प्रशासन ने अवैध खनन के 437 मामले चिह्नित किए। इसमें एक मामला 37 करोड़ रुपये राजस्व हानि का था। अवैध खनन में यह जुर्माना वसूला जाना था, मगर उस वक्त बिना जुर्माना वसूले ही छोड़ दिया। ज्यादातर मामले ऐसे ही पाए गए, मगर सीबीआई टीम के लौटने के बाद चिह्नित हुए अवैध खनन के मामलों में कमी आ गई। प्रशासन ने अब अवैध खनन के 242 नोटिस भेजा गया है।
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यमुना किनारे नहीं थम रहा है अवैध खनन
भले ही एनजीटी ने खनन पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है, मगर यमुना किनारे लगातार अवैध खनन जारी है। यही कारण है कि जिले के थानों में हर दिन खनन सामग्री से भरे वाहन पकड़े जा रहे हैं। इसके अलावा लगातार अवैध खनन किया जा रहा है, मगर स्थानीय पुलिस और प्रशासन केवल मूकदर्शक बना हुआ है।

नोटिस निरस्त करने की मांग
स्टोन क्रशर ऑनर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से सुंदरपुर जोन के 38 स्टोन क्रशर को जारी जुर्माना नोटिस निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि सुंदरपुर के सभी 44 स्टोन क्रशर को 20 फरवरी 2015 को नोटिस हुआ था। मगर छह स्टोन क्रशर ने न्यायालय में गुहार लगाई थी और नोटिस समाप्त हो गए थे। एसोसिएशन ने जिला प्रशासन के साथ खनन माफिया के गठजोड़ का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जुलाई 2012 में रिपोर्ट आने के बाद नोटिस 2015 में जारी किया और जुर्माना नोटिस करीब साढ़े पांच साल बाद जारी किया। जिला प्रशासन ने खनन माफियाओं को बचाने और स्टोन क्रशर मालिकों को फंसाने के लिए किया है।
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अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अवैध खनन के जुर्माने के मामलों की समीक्षा की जा रही है।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त
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