डैडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के लिए अर्जित भूमि को लेकर हुई समीक्षा बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। डैडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना अंबाला डिवीजन के लिए अर्जित की गई भूमि की समीक्षा को लेकर सोमवार को एक बैठक डीएम की अध्यक्षता में हुई। डीएम ने कहा कि जिन गांवों में 75 प्रतिशत या उससे अधिक भुगतान हो चुका है। उन गांवों में डीएफसीसी विभाग कब्जा कर कार्य शुरू करें। जिन गांवों में भुगतान अवशेष है, उन गांवों में अपने स्तर से प्रभावित भू स्वामियों से संपर्क कर उनके प्रपत्र प्राप्त करते हुए संबंधित तहसीलदार से पत्रावलियों पर आख्या प्राप्त कर कार्यालय को प्रस्तुत कराएंगे, जिससे तिथि निर्धारित कर प्रभावित भू स्वामियों को उनकी अर्जित भूमि के प्रतिकर का भुगतान किया जा सके।
डीएफसीसी अंबला डिवीजन के अंतर्गत नए प्रस्तावों में यूसुफपुर, लाखनौर, खटौली, मेघछप्पर तथा दराअली स्वाद आदि सात गांव ऐसे हैं, जिनमें भुगतान का प्रतिशत जीरो है। इन गांवों में डीएफसीसी के प्रतिनिधि एवं संबंधित तहसीलदार से समन्वय स्थापित करते हुए उनके प्रतिकर की पत्रावलियां तैयार कर कार्यालय में प्रस्तुत करेंगे। साथ ही विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी भुगतान की तिथि तय कर उनका भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कराएंगे। डीएफसीसी के प्रतिनिधि द्वारा अवगत कराया गया कि गांव शेखपुरा में स्थापित स्कूल के संबंध में खतौनी के आधार पर भूमि का भुगतान किया जा चुका है तथा हाईकोर्ट के आदेशानुसार स्कूल की बिल्डिंग के प्रतिकर की धनराशि की एफडीआर बनवायी जा चुकी है। इसका भुगतान किसको किया जाना है, यह अभी तक साफ नहीं हुआ है। डीएम ने उक्त प्रकरण में तहसीलदार/उपजिलाधिकारी से आख्या प्राप्त कर प्रकरण के निस्तारण के लिए पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। अंबाला डिवीजन के अंतर्गत गांव दराअली स्वाद तहसील सदर सहारनपुर केस के संबंध में अवगत कराया गया कि उक्त गांव में भूमि अर्जित करते हुए अवार्ड घोषित किया गया है, मगर तहसील से आख्या प्राप्त करने पर स्पष्ट हुआ है कि भूमि ग्राम समाज की है जिसका भुगतान नहीं होना है। ग्राम समाज की भूमि पर मदरसे का निर्माण किया गया है, उस मदरसे की संपत्ति का भुगतान किया जाना है। मगर मदरसे की संपत्ति का भुगतान प्राप्त नहीं किया जा रहा है। डीएम ने डीएफसीसी और तहसीलदार को समन्वय स्थापित कर प्रकरण की जांच करने को कहा। यह भी बताया गया कि अंबाला डिवीजन के तहत नलकूप खंड से संबंधित प्रकरण लंबित है। नलकूप खंड द्वारा मांगी गई धनराशि की सहमति डीएफसीसी द्वारा दे दी गई है, मगर नलकूप विभाग द्वारा अभी तक भूमि हस्तांतरण के संबंध में कोई कदम नहीं उठाया गया है। डीएम ने डीएफसीसी से इस संबंध में पत्रावली प्रस्तुत करने को कहा। डीएफसीसी अंबाला डिवीजन और मेरठ डिवीजन के परियोजना प्रबंधक ने डीएम को ताया कि पूर्व के प्रकरण लंबित पड़े हैं। सभी प्रकरण तहसीलों को भेजे जा चुके हैं पूर्णग्रहण से संबंधित धनराशि दी जा चुकी है, जिसका भुगतान अवशेष है। तहसील से आख्या चाही गई है जो अभी तक प्राप्त नही हुई है। बैठक में सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार, उप परियोजना प्रबंधक डीएफसीसीआईएल अंबाला डिवीजन सुरेंद्र सिंह, डीएफसीसीआईएल मेरठ डिवीजन के परियोजना प्रबंधक जेपी गोयल, एनएचएआई देहरादून के लाइजनिंग ऑफिसर विनय कुमार सिंह, एनएचएआई देहरादून के उप प्रबंधक तकनीकी अंशुल शर्मा, मदनपाल, श्याम कुमार, अजीत सिंह आदि मौजूद रहे।
राजमार्ग के लिए अर्जित भूमि की समीक्षा
डीएम की बैठक में सहारनपुर में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-72ए/73 के लिए अर्जित भूमि की भी समीक्षा की गई। समीक्षा करने पर स्पष्ट हुआ कि उक्त परियोजना के अंर्तगत कुल 79 गांवों में भूमि अर्जन की कार्यवाही की जानी है। अवगत कराया गया कि 79 गांवों में से 77 ग्रामों के अवार्ड घोषित किए जा चुके हैं। दो ग्राम चांदरपुर व छपरेड़ी के एवार्ड अभी तक लंबित हैं। इस संबंध में डीएम ने एक सप्ताह के भीतर लंबित एवार्ड तैयार कर एनएचएआई को भेजने के निर्देश दिए। डीएम को बताया गया कि गांव गुडम्ब का एवार्ड बनाकर एनएचएआई को भेजा जा चुका है, मगर उसकी स्वीकृति अभी तक प्राप्त नहीं हुई है। साथ ही 12 प्रतिशत अतिरिक्त धनराशि के भी अभिनिर्णय एनएचएआई स्तर पर लंबित हैं। डीएम ने लंबित अभिनिर्णयों की स्वीकृति धनराशि सहित तत्काल उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए, जिससे प्रभावित भू-स्वामियों को उनके प्रतिकर का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर कराया जा सके।